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INDEPENDENCE DAY: 7 अगस्‍त 1947 को जिन्ना ने कहा, दिल्‍ली को आखिरी बार देख रहा हूं

गांधी की टेन जिस स्‍टेशन पर रूक रही थी वहां लोगों की भारी भीड़ थी।

INDEPENDENCE DAY: 7 अगस्‍त 1947 को जिन्ना ने कहा, दिल्‍ली को आखिरी बार देख रहा हूं
नई दिल्ली. HARIBHOOMI.COM INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 7 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अभी आपने जाना कि 6 अगस्‍त 1947 को गांधी लाहौर से लौट रहे थे। गाड़ी आने में अभी देर थी इसलिए कांगेसी कार्यकर्ताओं से बात करते रहे। गांधी ने इस दौरान एक चौंकाने वाली बात कही। उन्‍होंने कहा कि वे अपनी बाकी की जिंदगी पाकिस्‍तान में गुजारना चाहते हैं। गांधी ने सिखों से पंजाब के बारे में बात की। कराची में प्रांतीय सरकार की बैठक हुए और फैसला हुआ कि सिंध से भारत को गेहूं न भेजा जाए।
कलकत्‍ता में स्थिति बिगड़ती जा रही थी। इसे देखते हुए ख्‍वाजा नजीमुद्दन और प्रफुल्‍ल चंद घोष ने अल्‍पसंख्‍यकों को आश्‍वासन दिया कि उनकी सुरक्षा का बंदोबस्‍त किया जाएगा और उनके साथ न्‍याययोचित व्‍यवहार होगा। उधर, कई प्रांतों में दंगे जारी थे। अलवर, लाहौर और कराची में बड़ी हिंसाएं हुई। लाल किले पर एक पार्टी का आयोजन किया गया। इस मौके पर जवाहर लाल नेहरू, बलदेव सिंह, करियप्‍पा, ब्रिेगेडियर रजा समेत बहुत से लोग मौजूद थे।जरनल करियप्‍पा और ब्रिगेडियर रजा ने भावुक भाषण दिए। करियप्‍पा ने ब्रिगेडियर रजा को एक ट्रॉफी दी। ट्रॉफी में दौ सैनिक बने हुए थे। हिंदू और मुसलमान।
7अगस्‍त 1947 जिन्‍ना पाकिस्‍तान जाने की तैयारी कर रहे थे। रूटीन की चीजें छोड़ कर कागजातों में व्‍यस्‍त थे। हवाई अड्डे पर पहुंचे तो वहां कुछ गिने-चुने लोग थे। जहाज की सीढि़यां चढ़ते हुए जिन्‍ना पीछ मुड़े और कहा, 'मैं दिल्‍ली को आखिरी बार देख रहा हूं।' यात्रा के दौरान भी जिन्‍ना भावशून्‍य थे। थकान के बावजूद पूरी यात्रा में अखबार पढ़ते रहे। कराची के मौरीपुर हवाई अड़डे पर जिन्‍ना के स्‍वागत के लिए 50 हजार से अधिक लोग मौजूद थे। लेकिन जिन्‍ना के चेहरे पर भावशून्‍यता थी।
जिन्‍ना जरा भी नहीं मुस्‍कुराए। गवर्नर हाउस की सीढियां चढ़ते समय जिन्‍ना थोड़ा मुस्‍कुराए और पीछे मुड़कर अपने एडीसी एहसान अली से कहा, 'मैंने सोचा भी नहीं था कि मैं अपनी जिंदगी में कभी पाकिस्‍तान देख पाऊंगा।' इससे पहले दिल्‍ली से रवाना होते समय जिन्‍ना ने कहा था, ' मैं दिल्‍ली से विदा ले रहा हूं। मैं चाहता हूं कि जो कुछ बीत गया उसे भूल जाएं। भारत और पाकिस्‍तान एक अच्‍छे पड़ोसी की तरह नई शुरूआत करें। मैं भारत की समृधि और शांति की कामना करता हूं।' पाकिस्‍तान में एक दिन की छुट्टी घोषित थी। सभी लोग जिन्‍ना को देखने के लए बेताब थे।
नीचे की स्‍लाइड्स में जानिए, माउंटबेटन ने वायसराय हाउस में ज्‍योतिष की नियुक्ति की।
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