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INDEPENDENCE DAY: 6 अगस्‍त 1947 गांधी ने किया पाकिस्‍तान में रहने का फैसला

ख्‍वाजा नजीमुद्दन और प्रफुल्‍ल चंद घोष ने अल्‍पसंख्‍यकों को आश्‍वासन दिया कि उनकी सुरक्षा का बंदोबस्‍त किया जाएगा

INDEPENDENCE DAY: 6 अगस्‍त 1947 गांधी ने किया पाकिस्‍तान में रहने का फैसला
नई दिल्ली. HARIBHOOMI.COM INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 6 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अभी आपने जाना कि 5 अगस्‍त 1947 को कलकत्‍ता और बंगाल के चुनावों में जिन्‍ना समर्थक को जीत हुई। बंगाल में जिन्‍ना समर्थक निर्विरोध चुने गए। कराची में एम ए खोरो लिग एसेम्‍बली पार्टी के नेता चुने गए और यह तय हो गया कि वे 15 अगस्‍त को गुलाम हुसैन रायतुल्‍ला की जगह सिंध के नए प्रधानमंत्री बनेंगे। कलकत्‍ता में क्‍लाइव स्‍ट्रीट का नाम बदलकर नेता जी सुभाष चंद बोस रखने का फैसला हुआ। तेज बारिश के बावजूद गांधी रावलपिंडी गए।
पूरे देश में दंगे का माहौल था। कलकत्‍ता, लुधियाना, फिरोजपुर, अम्‍बाला, हैदराबाद और रामपुर में खूब दंगे हुए। माउंटबेटन दंगों के साथ-साथ एक और बात से चिंतित थे। दरअसल पंजाब में सिख बहुत बड़ी साजिश रच रहे थे। वे जिन्‍ना को मारने और ट्रेन को बम से उड़ाने की साजिश रच रहे थे। इधर दिल्‍ली में लोग भूख से जूझ रहे थे। दिल्‍ली में अनाज की भारी कमी थी। अनेक तरह की बीमारियों ने लोगों को अपने शिकंजे में ले लिया था।
6 अगस्‍त 1947 को गांधी लाहौर से लौट रहे थे। गाड़ी आने में अभी देर थी इसलिए कांगेसी कार्यकर्ताओं से बात करते रहे। गांधी ने इस दौरान एक चौंकाने वाली बात कही। उन्‍होंने कहा कि वे अपनी बाकी की जिंदगी पाकिस्‍तान में गुजारना चाहते हैं। गांधी ने सिखों से पंजाब के बारे में बात की।
कराची में प्रांतीय सरकार की बैठक हुए और फैसला हुआ कि सिंध से भारत को गेहूं न भेजा जाए। कलकत्‍ता में स्थिति बिगड़ती जा रही थी। इसे देखते हुए ख्‍वाजा नजीमुद्दन और प्रफुल्‍ल चंद घोष ने अल्‍पसंख्‍यकों को आश्‍वासन दिया कि उनकी सुरक्षा का बंदोबस्‍त किया जाएगा और उनके साथ न्‍याययोचित व्‍यवहार होगा।
उधर, कई प्रांतों में दंगे जारी थे। अलवर, लाहौर और कराची में बड़ी हिंसाएं हुई। लाल किले पर एक पार्टी का आयोजन किया गया। इस मौके पर जवाहर लाल नेहरू, बलदेव सिंह, करियप्‍पा, ब्रिेगेडियर रजा समेत बहुत से लोग मौजूद थे। जरनल करियप्‍पा और ब्रिगेडियर रजा ने भावुक भाषण दिए। करियप्‍पा ने ब्रिगेडियर रजा को एक ट्रॉफी दी। ट्रॉफी में दौ सैनिक बने हुए थे। हिंदू और मुसलमान।

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