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INDEPENDENCE DAY: 4 अगस्‍त 1947 को गांधी ने कश्मीर के बारे में कहा कि यहां के लोग इसका फैसला करेंगे

बंबई में ताजमहल होटल पर बड़ा भारतीय झंडा फैराने का फैसला किया गया।

INDEPENDENCE DAY: 4 अगस्‍त 1947 को गांधी ने कश्मीर के बारे में कहा कि यहां के लोग इसका फैसला करेंगे
नई दिल्ली. HARIBHOOMI.COM INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 4 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अभी आपने जाना कि 3 अगस्‍त 1947 को वायसराय हाउस में कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं हुई। राजनीतिक गतिविधियां दिल्‍ली से बाहर ही हुई। श्रीनगर में गांधी ने कश्‍मीर के राजा हरि सिंह से बात की। प्रधानमंत्री काक समेत कई प्रतिनिधियों से बात की। इससे पहले गांधी ने मुजाहिद मंजिल जाकर नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकर्ताओं से बात की।विजय लक्ष्‍मी पंडिय मास्‍को जाते वक्‍त कराची रूकीं। वे जिस विमान में थीं उस विमान पर भारत का झंडा लगा था। ऐसा पहली बार हुआ था। लाहौर, हैदराबाद, बंबई और शोलापुर में हिंसक वारदातें हुईं। डेरा स्‍माइल खान में नवाबजादा अल्‍लाह नवाज खान ने कहा कि सेनाओं के जरिए पठानों को गुलाम नहीं बनाया जा सकता। कलकत्‍ता में समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने विलय संधियों की आलोचना की।

4 अगस्‍त 1947 को कलत के खान नवावजादा मोहम्मद असलम खान और सर सुलतान अहमद ने अपनी रियासत के संबंध में लार्ड माउंटबेटन से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना और लियाकत भी वहां पहुंच गए। वे इस बात पर सहमत थे कि कलत पर सुलह हो जाए। और एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जाएं जिसमें लिखा हो कि पाकिस्तान सरकार स्वतंत्र औऱ संप्रभु राज्य के तौर कलत की हैसियत स्वीकार करती है। यानि कि उसकी हैसियत भारतीय रियासतों की हैसियत से अलग होगी।

दोपहर बाद भोपाल के नवाब हमीदुल्ला ने वायसराय से भेंट की इस बीच उन्हें नेहरू की दो चिट्ठियां मिलीं जिसमें एक लाहौर से पलायन रोकने के बारे में थी वहीं दूसरी में मंत्रिमंडल के छह सदस्यों के नामों की शिफारिश में थी। ये थे डॉ. भीमराव अंबेडकर, राजकुमारी अमृत कौर, रफी अहमद किदवई, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, क्षणमुखं शेट्टी और नरहरि गाडगिल।

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