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INDEPENDENCE DAY: 31 जुलाई 1947 को अमृतसर में लगे थे गांधी वापस जाओ के नारे

गांधी कश्मीर दौरे पर गए थे और रियासतों को पांच अगस्त तक सोचने का समय दे दिया गया था।

INDEPENDENCE DAY: 31 जुलाई 1947 को अमृतसर में लगे थे गांधी वापस जाओ के नारे
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 31 जुलाई 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अभी तक गांधी और नेहरू में से गांधी का कश्‍मीर जाना तय हो गया था। गांधी ने कश्‍मीर जाने के लिए फ्रंटियर मेल पकड़ी। उन्होंने विजय लक्ष्‍मी, राजेन्‍द्र प्रसाद, सरोजनी नायडू, खान अब्‍दुल गफ्फार खां से बात की। माउंटबेटन के प्रेस सचिव भी उनसे मिले। खान अब्‍दुल गफ्फार खां से अपनी आखिरी मुलाकात के समय गांधी ने उन से कहा आपका कर्तव्‍य वहीं जाकर पाकिस्‍तान को सचमुच पाक बनाना है। इसी बीच आधिकारिक रूप से ब्रिगेडियर केएम करियप्‍पा, मोहम्‍मद अकबर खान और राजेंद्र सिंह को मेजर जरनल बना दिया गया था।
31 जुलाई को गांधी जहां कश्मीर के दौरे पर थे वहीं, दिल्ली में भी राजनीतिक हलचलें जारी थीं। 14 जुलाई से शुरू हुई संविधान सभा की बैठक 14 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद नेहरू ने माउंटबेटन को खत लिखा और उनसे सरोजिनी नायडू को संयुक्त प्रांत का गवर्नर बनाने के लिए कहा। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि बिधानचंद्र राय का लखनऊ पहुंचना सितंबर में तय हुआ था। गांधी अमृतसर में उतरे तो उनका काफी विरोध हुआ और लोगों ने 'गांधी वापस जाओ' के नारे लगाए। बंटवारे को लेकर गांधी का भारत में विरोध हो रहा था। यहां गांधी के खिलाफ इतने जोरदार नारे लगाए गए कि गांधी को अपनी अंगुलियां कानों में डालनी पड़ी थीं।
इस दिन एक और महत्वपूर्ण बात हुई थी। जैसा कि आप जानते हैं, अब तक रियासतों के एकीकरण का काम काफी परवान चढ़ चुका था लेकिन कई रियासतों ने अभी तक भारत या पाकिस्तान में शामिल होने पर फैसला नहीं लिया था। इसलिए संविधान सभा की बैठक खत्म होने के साथ ही सभी रियासतों को जवाब भिजवा दिया गया कि पांच अगस्त तक सभी रियासतें अपने विलय के बारे में फैसला कर लें।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़ें, बंटवारा ठीक से कराने पर लिस्टुअल को अर्ल का खिताब दिलाने की सिफारिश-

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