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INDEPENDENCE DAY: 31 अगस्‍त 1947 को नेहरू ने किया दंगा प्रभावित पंजाब का दौरा

राष्‍ट्रधर्म के इस अंक में बाद में भारत के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी बाजपेयी की कविता छपी थी।

INDEPENDENCE DAY: 31 अगस्‍त 1947 को नेहरू ने किया दंगा प्रभावित पंजाब का दौरा

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 31 गस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि भारतीय संविधान के गठन के लिए सदस्यों का चुनाव होना था और जिसके गठन से भारत का अपना संविधान होगा और भारत अंग्रेजों की गुलामी से पुरी तरह से मुक्त हो जाएगी। ऐसा कहने का मतलब यह है कि अभी तक 15 अगस्त 1947 से अब तक ब्रिटेन संविधान के मुताबिक ही भारतीय संसद की कार्रवाई चल रही थी। संसद में सर्वसम्मति से इस बात पर सभी एक मत होते है कि इस कमेटी का अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर को बनाया गया। उनकी मदद के लिए छः लोगों को चुना गया। जिनमें के.एम. मुंशी, अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, एन. गोपालस्वामी अयंगर, बी.एल. मिट्टर, मो. सदुल्लाह और डी.पी. खैतान को शामिल किया गया।

आज हम आपको बताएंगे कि 31 अगस्त 1947 के दिन के बारे में बातएंगे। 31 अगस्‍त 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पंजाब के दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ लियाकत अली और सरदार पटेल भी थे। देश के कई हिंस्‍सों में हो रही झड़पों की कुछ घटनाओं से नेहरू चिंतित थे। एक ओर जहां संविधान सभा के गठन पर बात हो रही थी तो दूसरी ओर राजनीति समेत पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कई संभावनाएं तलाशी जा रही थी। इसी दिन लखनऊं से 31 अगस्त, 1947 के दिन 'राष्ट्रधर्म' का प्रथम अंक प्रकाशित हुआ। इस अंक की 3000 प्रतियां प्रकाशित हुईं जो हाथोंहाथ बिक गयीं तथा 500 प्रतियां और छपवानी पड़ीं। इस अंक में बाद में भारत के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी बाजपेयी की कविता छपी थी। राष्‍ट्रधर्म के पहले संपादक भी अटल बिहारी बाजपेयी ही थे। उधर कई रियासतों ने अभी तक तय नहीं किया था कि वे पाकिस्‍तान में शामिल होंगे या भारत में। देश में छुटपुट हिंसा की कुछ खबरें थीं। देश का अल्‍पसंख्‍यक दुविधा में था। जहां लोगों में आजद भारत को लेकर उल्‍लास था वहीं कई हिस्‍सों में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, कश्‍मीर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी-
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