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INDEPENDENCE DAY: 30 जुलाई 1947 छूटी गांधी की ट्रेन, वापस हुए सुभाष चंद्र बोस के सभी मुकदमे

यात्रा के बावजूद गांधी ने अपना दिन का कार्यक्रम बिल्‍कुल नहीं बदला।

INDEPENDENCE DAY: 30 जुलाई 1947 छूटी गांधी की ट्रेन, वापस हुए सुभाष चंद्र बोस के सभी मुकदमे

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 30 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने जाना कि अभी तक यह तय नहीं हुआ था कि गांधी और नेहरू में से कश्‍मीर कौन जाएगा। इस मसले पर दोनों नेता पटेल के साथ साढ़े दस बजे वायसराय हाउस पहुंचे। माउंटबेटन ने इस बाबत पटेल से पूछा तो उनका दो टूक जवाब था कि दोनों में से किसी को भी कश्‍मीर नहीं जाना चाहिए, लेकिन नेहरु की मानसिक हालत देखकर लगता है की दोनों में से एक को वहां जाना पड़ेगा। और गांधी का जाना तय हुआ।

अब हम आपको 30 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। रात में गांधी ने कश्‍मीर यात्रा के सिलसिले में फ्रंटियर मेल पकड़ी रावलपिंडी तक के लिए, जो उनका पहला पड़ाव था। गांधी के साथ सुशीला नय्यर, बृजकृष्‍ण चांदी वाला, तनु और आवा गांधी भी थीं। वैसे जब फ्रंटियर मेल दिल्‍ली स्‍टेशन से छूटी तो गांधी उसमें नहीं थे। फिर ट्रेन दिल्‍ली से बाहर एक छोटे से स्‍टेशन पर रूकी तो वहां गांधी उस पर सवार हुए।

इस यात्रा के बावजूद गांधी ने अपना दिन का कार्यक्रम बिल्‍कुल नहीं बदला। उन्‍होंने सुबह 3 बजे उठकर गीता का पाठ किया, सूत काटा, चिट्ठियां लिखीं, विजय लक्ष्‍मी, राजेन्‍द्र प्रसाद, सरोजनी नायडू, खान अब्‍दुल गफ्फार खां से बात की और शाम की प्रार्थना सभा में भी शामिल हुए। दिन में माउंटबेटन के प्रेस सचिव भी उनसे मिले। खान अब्‍दुल गफ्फार खां से अपनी आखिरी मुलाकात के समय गांधी ने उन से कहा आपका कर्तव्‍य वहीं जाकर पाकिस्‍तान को सचमुच पाक बनाना है। इसी बीच आधिकारिक रूप से ब्रिगेडियर केएम करियप्‍पा, मोहम्‍मद अकबर खान और राजेंद्र सिंह को मेजर जरनल बना दिया गया है।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, वापस लिए गए सुभाष चंद बोस के खिलाफ सभी मुकदमे -

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