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INDEPENDENCE DAY: 29 जुलाई 1947 को तय हो गया कि कश्‍मीर गांधी जाएंगे, उच्‍चतम न्‍यायालय के गठन का प्रस्‍ताव स्‍वीकार

उच्‍चतम न्‍यायालय के गठन का प्रावधान स्‍वीकार किया और कहा कि इसके न्‍यायाधिशों को केवल राष्‍ट्रपति हटा सकेंगे।

INDEPENDENCE DAY: 29 जुलाई 1947 को तय हो गया कि कश्‍मीर गांधी जाएंगे, उच्‍चतम न्‍यायालय के गठन का प्रस्‍ताव स्‍वीकार

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 28 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने जाना कि इस दिन दिल्ली में संविधान सभा में भारत के लिए संसदीय प्रणाली की ब्रिटिश मॉडल अपना लिया जाता है। जिसमें संसद के प्रति मंत्री मंडल के सामूहिक उत्तरदायितव की व्यवस्था थी और ये भी कहा गया था कि राष्ट्रपति को वित्तीय प्रावधान वाले विधेयक को लौटाने का अधिकार नहीं होगा। कांग्रेस और मुस्लिम लीग में कार्यकारणीय और विधायिका के अधिकारों को लेकर काफी मतभेद थे पर सभा ने नेहरू के ब्रिटिश प्रणाली का संसोधन मान लिया। हैं।

अब हम आपको 29 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। अभी तक यह तय नहीं हुआ था कि गांधी और नेहरू मे से कश्‍मीर कौन जाएगा। इस मसले पर दोनों नेता पटेल के साथ साढ़े दस बजे वायसराय हाउस पहुंचे। माउंटबेटन ने इस बाबत पटेल से पूछा तो उनका दो टुक जवाब था कि दानों में से किसी को भी कश्‍मीर नहीं जाना चाहिए, लेकिन नेहरु की मानसिक हालत देखकर लगता है की दोनों में से एक को वहां जाना पड़ेगा।
पटेल ने कहा कि अब सवाल दो में से एक बुराई को चुनने का है और मुझे लगता है कि गांधी की यात्रा कम बुरी होगी। बैठक के बाद नेहरु कुछ और बाचचीत के लिए माउंटबेटन के पास वहां रूक गए। इस दौरान औकिंगलेक पर नेहरू की आपत्तियों पर चर्चा हुई। माउंटबेटन ने अपनी ओर से सफाई दी जिस पर नेहरू कुछ हद तक संतुष्‍ट लगे। दोपहर बाद वायसराय हाउस में ही अस्‍थाई संयुक्‍ति रक्षा परिषद की बैठक हुई और उसके बाद माउंटबेटन ने जिन्‍ना, लियाकत और फंटेयर के गवर्नर लौखाट से बात की। जिन्‍ना का कहना था कि खान साहब प्रधानमंत्री बनने के काबिल हैं ही नहीं इसलिए उन्‍हें इस्‍तीफा न देने की स्थिति में बर्खास्‍त कर देना चाहिए।
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