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INDEPENDENCE DAY: 28 जुलाई 1947 को नेहरू ने ब्रिटिश मॉडल को भारतीय संविधान के रूप में अपनाया

कांग्रेस और मुस्लिम लीग में कार्यकारणीय और विधायिका के अधिकारों को लेकर काफी मतभेद थे।

INDEPENDENCE DAY: 28 जुलाई 1947 को नेहरू ने ब्रिटिश मॉडल को भारतीय संविधान के रूप में अपनाया
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 28 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने जाना कि 27 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों खास था। 27 जुलाई का दिन दंगों के नाम रहता है। सिख समुदाय सीमा आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने को तैयार नहीं था। वो अपनी इस मांग पर अड़े हुए थे कि सिखों के सभी धर्मस्थल पूर्वी पंजाब में कर दिये जाएं। इसी को लेकर ननकाना साहब में सिख संगत के लिए प्रतिबंधों के बावजूद काफी लोग जमा होते हैं। भीड़ के अनियंत्रित होने पर पुलिस को गोली चलानी पड़ती है। इससे माहौल और अराजक हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ सरदार पटेल ने रियासतों के शासकों के सम्मान में पार्टी का आयोजन करते हैं। ताकि रियासतों के ज्यादतर शासक भारत में शामिल किया जा सके। हैदराबाद, औरंगाबाद, नागपुर, कानपुर और चंद्रनगर में दंगे भड़कते हैं।
अब हम आपको 28 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। इस दिन दिल्ली में संविधान सभा में भारत के लिए संसदीय प्रणाली की ब्रिटिश मॉडल अपना लिया जाता है। जिसमें संसद के प्रति मंत्री मंडल के सामूहिक उत्तरदायितव की व्यवस्था थी और ये भी कहा गया था कि राष्ट्रपति को वित्तीय प्रावधान वाले विधेयक को लौटाने का अधिकार नहीं होगा। कांग्रेस और मुस्लिम लीग में कार्यकारणीय और विधायिका के अधिकारों को लेकर काफी मतभेद थे पर सभा ने नेहरू के ब्रिटिश प्रणाली का संसोधन मान लिया।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, संविधान सभा की बैठक को बीच में ही छोड़कर नेहरु क्यों चले जाते हैं -

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