Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

INDEPENDENCE DAY: 27 जुलाई 1947, पटेल ने दी रियासतों के शासकों को पार्टी, सिख थे दंगों को तैयार

इस दिन हैदराबाद, औरंगाबाद, नागपुर, कानपुर और चंद्रनगर में दंगे भड़क उठे।

INDEPENDENCE DAY: 27 जुलाई 1947, पटेल ने दी रियासतों के शासकों को पार्टी, सिख थे दंगों को तैयार
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 26 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने जाना कि 26 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों खास था। 26 जुलाई को जवाहरलाल नेहरू फील्ड मार्शल ऑकिनलेक के रवैये से बहुत नाराज थे। इसी बात से नाराज होकर ही उन्होनें लिखा कि अगर उनका रवैया नहीं बदला तो संयुक्त रक्षा परिषद के ढांचे पर नए सिरे से विचार करना पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में कैलाश नाथ काटजू ने खाद्यान संकट पर चिंता जताई। इस समय किसानों की हालत खराब थी, साथ ही कहीं से भी आयात होने की भी संभावना नहीं थी। अंग्रेजों नकदी फसलों को बढ़ावा देने के कारण देश में अनाज की कमी हो गई थी।
आजादी से पहले 27 जुलाई 1947 का दिन ज्यादातर दंगों के नाम रहा। सिख समुदाय सीमा आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने को तैयार नहीं था। उनकी मांग थी कि सिखों के सभी धर्मस्थल पूर्वी पंजाब में कर दिये जाएं। इसी को लेकर ननकाना साहब में सिख संगत के लिए प्रतिबंधों के बावजूद काफी लोग जमा हुए थे। भीड़ के अनियंत्रित होने पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इससे माहौल और अराजक हो गया। इस मामले में जिनकिंस ने वायसराय को पत्र लिखा कि सिख सीमा आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ सरदार पटेल ने रियासतों के शासकों के सम्मान में पार्टी का आयोजन किया। इसमें उन्हें भरोसा था कि रियासतों के ज्यादतर शासक भारत में शामिल होने को तैयार हो गए थे। हैदराबाद, औरंगाबाद, नागपुर, कानपुर और चंद्रनगर में दंगे भड़क उठे।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, लार्ड लौखट को भारतीय सेना का थलसेनाध्यक्ष बनाया गया था -

खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-
Next Story
Top