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INDEPENDENCE DAY: 27 अगस्‍त 1947 को संसद में पेश किया गया अल्पसंख्यक विशेषाधिकार मसौदा

अल्पसंख्यकों को विशेष अधिकार देने के लिए संसद में पेश हुआ मसौदा।

INDEPENDENCE DAY: 27 अगस्‍त 1947 को संसद में पेश किया गया अल्पसंख्यक विशेषाधिकार मसौदा
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 27 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 26 अगस्त 1947 की सुहानी सुबह भारत के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर लेकर आई थी। भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान ने भोपाल का विलय भारत में करने की घोषणा कर दी। उनका यह फैसला भारत के लिए बहुत ही खुशियों भरा था क्योंकि स्वतंत्रता से पूर्व उन्होंने अपने विलय के लिए सरदार पटेल को साफ मना कर दिया था और एक स्वतंत्र राज्य के रूप में रहने की घोषणा की थी। लेकिन सरदार पटेल की कूटनीतिक रणनीति आखिरकार भारत के काम आई और नवाब विलय के लिए जारी हुए।
आज हम आपको बताएंगे कि 27 अगस्त 1947 के दिन के बारे में बातएंगे। बुधवार का दिन भारतीय संसद में एक बड़ी रिपोर्ट पेश होने वाला था जिसका नाम था अल्पसंख्यक अधिकार मसौदा। स्वतंत्रता के बाद अधिकतर मुस्लमान पाकिस्तान जा चुके थे और जैसा कि भारत ने हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र नहीं बल्कि सैक्यूलर राष्ट्र घोषित किया। ऐसे में भारत में जो मुस्लिम रह गए वो हिंदुओं के मुकाबले बहुत कम थे और जो थे वो बहुत ही पिछड़े वर्ग के थे। ऐसे में उनके अस्तित्व पर कोई खतरा न हो उनके लिए देश में खास अधिकार देने का फैसला करती है।
भारत के मुस्लमानों की दिक्कतों और उन्हें मुख्य विचारधारा से जोड़ने की कोशिश करने के लिए सरकार उनको कुछ खास अधिकार देने की घोषणा करना चाहती है जिसके लिए भारतीय संविधान में एक आयोग का गठन किया जाता गया।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या खास अधिकार देने की बात की गई थी -
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