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INDEPENDENCE DAY: 26 जुलाई 1947, नेहरू ने फील्ड मार्शल ऑकिनलेक को दी थी रवैया सुधारने की चेतावनी

जवाहरलाल नेहरू फील्ड मार्शल ऑकिनलेक के रवैये से बहुत नाराज थे।

INDEPENDENCE DAY: 26 जुलाई 1947, नेहरू ने फील्ड मार्शल ऑकिनलेक को दी थी रवैया सुधारने की चेतावनी
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 26 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने जाना कि 25 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों खास था। 25 जुलाई 1947 को दिल्ली में रियासतों के शासकों का सम्मेलन हुआ, जिसमें माउण्ट बेटन ने पहली और आखिरी बार भाषण दिया। इस बैठक में बेटन के स्वागत के लिए लाल कालीन बिछाई गईं। साथ ही उनके स्वागत के लिए फूलों से मंच को सजाया गया था। इसमें बेटन बगैर नोट्स के घंटो बोलते रहे।
इस दौरान काफी गर्मी पड़ रही थी लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। कुछ रिसासतों के राजाओं की मंशा थी कि वे भारत में खुद को शामिल न करें लेकिन बेटन इसके पक्ष में नहीं थे। इसमें उन्होंने कहा कि 565 में से ज़्यादातर रियासतें भौगोलिक रुप से भारत के करीब हैं। वे अपने पड़ोसी देश से दूर नहीं जा सकते। माउण्ट बेटेन ने एटली को ख़बर भेजी कि रजवाड़ों के साथ बैठक सफल रही है। खड़गपुर और सिलहट में दंगे हुए। जिसकी वजह से कलकत्ता में कर्फ्यू की अवधि बढ़ा दी गई।
जवाहरलाल नेहरू फील्ड मार्शल ऑकिनलेक के रवैये से बहुत नाराज थे। इसी बात से नाराज होकर ही उन्होनें लिखा कि अगर उनका रवैया नहीं बदला तो संयुक्त रक्षा परिषद के ढांचे पर नए सिरे से विचार करना पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में कैलाश नाथ काटजू ने खाद्यान संकट पर चिंता जताई। इस समय किसानों की हालत खराब थी, साथ ही कहीं से भी आयात होने की भी संभावना नहीं थी। अंग्रेजों नकदी फसलों को बढ़ावा देने के कारण देश में अनाज की कमी हो गई थी।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, माउंटबेटन ने की थी भारतीय झंडे में यूनियन जैक की मांग-

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