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INDEPENDENCE DAY: 26 अगस्‍त 1947 को भोपाल का विलय भारत में हुआ, पटेल को मिली बढ़ी कामयाबी

भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान ने भोपाल का भारत में विलय करने की घोषणा की।

INDEPENDENCE DAY: 26 अगस्‍त 1947 को भोपाल का विलय भारत में हुआ, पटेल को मिली बढ़ी कामयाबी
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 25 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 25 अगस्त 1947 को पंजाब हिंसा की रिपोर्ट के संसद पेश हुई। जहां सत्र के दौरान पंजाब के जनरल अलगुराई शास्त्री संसद स्थगित करने की गुजारिश की। उन्होंने कहा था कि आज (25 अगस्त 1947) की सभा को हमें स्थगित कर देना चाहिए क्यों पश्चिम पंजाब में स्वतंत्रता के दौरान जो हत्याएं हुई थी उनके परिवार वालों को हमारी तरफ से संवेदना वक्त करने का वक्त है। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो देशवासियों गलत संदेश जाएग। दूसरी तरफ उनकी इस बात का विरोध भी किया गया मौलाना हसरत मोहानी ने कहा कि हमें सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित नहीं करना चाहिए बल्कि 15 मिनट के लिए स्थगित कर देना चाहिए और उनकी इस बात को मान लिया गया।

आज हम आपको बताएंगे कि 26 अगस्त 1947 के दिन के बारे में बातएंगे। मंगलवार की सुहानी सुबह शायद कोई मंगल खबर मिलने वाली थी देश को और मिली भी। भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान ने भोपाल का भारत में विलय करने की घोषणा की। उनका यह फैसला भारत के लिए बहुत ही कामयाबी भरा माना गया। गौरतलब है कि स्वतंत्रता से पूर्व उन्होंने अपने विलय के लिए सरदार पटेल को साफ मना कर दिया था और एक स्वतंत्र राज्य के रूप में रहने की घोषणा की थी। लेकिन सरदार पटेल की कूटनीतिक रणनीति आखिरकार भारत के काम आती है और नवाब विलय के लिए जारी हो जाते हैं।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, भोपाल का विलय भारत के लिए क्यों जरूरी था-
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