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INDEPENDENCE DAY: 25जुलाई 1947, रजवाड़ों को लेकर माउंट बेटन ने दिया था अंतिम भाषण

25 जुलाई 1947 को दिल्ली में रियासतों के शासकों का सम्मेलन हुआ, जिसमें माउण्ट बेटन ने पहली और आखिरी बार भाषण दिया।

INDEPENDENCE DAY: 25जुलाई 1947, रजवाड़ों को लेकर माउंट बेटन ने दिया था अंतिम भाषण
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 25 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने जाना कि 24 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों खास था। 24 जुलाई 1947 का दिन बहुत ही अहम था। विभाजन परिषद में भारत-पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने घोषणा कि इसको जो फैसला होगा उन्हें पूरी तरह स्वीकार होगा। माउण्ट बेटेन को इस स्वीकृति से हैरानी थी कि दोनो तरफ के नेताओं ने उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए। मद्रास में देवदासी प्रथा के बारे में एक आदेश जारी हुआ, जिसका स्वागत भी हुआ और विरोध भी। दक्षिण भारत की इस कुप्रथा को बंद करने में बहुत से ब्राहमणवादी संगठन एकत्रित हो गए, और इसका जमकर विरोध किया।
25 जुलाई 1947 को दिल्ली में रियासतों के शासकों का सम्मेलन हुआ, जिसमें माउण्ट बेटन ने पहली और आखिरी बार भाषण दिया। इस बैठक में बेटन के स्वागत के लिए लाल कालीन बिछाई गईं। साथ ही उनके स्वागत के लिए फूलों से मंच को सजाया गया था। इसमें बेटन बगैर नोट्स के घंटो बोलते रहे। इस दौरान काफी गर्मी पड़ रही थी लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। कुछ रिसासतों के राजाओं की मंशा थी कि वे भारत में खुद को शामिल न करें लेकिन बेटन इसके पक्ष में नहीं थे। इसमें उन्होंने कहा कि 565 में से ज़्यादातर रियासतें भौगोलिक रुप से भारत के करीब हैं। वे अपने पड़ोसी देश से दूर नहीं जा सकते। माउण्ट बेटेन ने एटली को ख़बर भेजी कि रजवाड़ों के साथ बैठक सफल रही है। खड़गपुर और सिलहट में दंगे हुए। जिसकी वजह से कलकत्ता में कर्फ्यू की अवधि बढ़ा दी गई।
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