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INDEPENDENCE DAY: 25 अगस्‍त 1947 को संसद में पंजाब हिंसा की रिपोर्ट पर जमकर हुई बहस

पंजाब हिंसा की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 हजार लोगों ने अपनी जान गवाई।

INDEPENDENCE DAY: 25 अगस्‍त 1947 को संसद में पंजाब हिंसा की रिपोर्ट पर जमकर हुई बहस
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 25 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 24 अगस्त 1947 को पंजाब हिंसा की रिपोर्ट आई जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि विभाजन के दौरान पंजाब में हुए हिंसा के दौरान 10 हजार लोगों की जान गई। इस हिंसा में हिंदू- मुस्लिम दोनों समुदायों की मौत हुई थी। मरने वालों में अधिकतर मुस्लिम थे। हिंसा का कारण था दोनों समुदायों के बीच पंजाब का विभाजन। हिंदू-सिक्ख चाहते थे कि पंजाब भारत में रहे और मुस्लिम चाहते थे कि सिंध के साथ पंजाब भी पाकिस्तान के हिस्से में आ जाए। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि जिन्ना और नेहरू पहले से ही ये जानते थे कि बंटवारे के वक्त पंजाब में बड़ी हिंसक घटनाएं जरूर घटेगी बावजूद इसके वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे।
आज हम आपको बताएंगे कि 25 अगस्त 1947 के दिन के बारे में बातएंगे। इस दिन सोमवार का दिन होता है और पंजाब हिंसा की रिपोर्ट के बाद सबकी नजरें संसद पर थी कि देश के नेता इस रिपोर्ट पर क्या राय रखती है और पीडितों को राहत देने के लिए क्या करेगी। संसद सत्र के दौरान पंजाब के जनरल अलगुराई शास्त्री संसद स्थगित करने की गुजारिश करते हैं। वह करते हैं कि आज की सभा को हमें स्थगित कर देना चाहिए क्यों पश्चिम पंजाब में स्वतंत्रता के दौरान जो हत्याएं हुई थी उनके परिवार वालों को हमारी तरफ से संवेदना वक्त करने का वक्त है।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, संसद की कार्रवाई बंद करने से किसने किया था मना -
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