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INDEPENDENCE DAY: 24 जुलाई 1947, दक्षिण भारत की कुप्रथा देवदासी पर लगा था प्रतिबंध

देवदासी हिन्दू धर्म में ऐसी स्त्रियों को कहते हैं जिनका "विवाह" मन्दिर या अन्य किसी धार्मिक प्रतिष्ठान से कर दिया जाता है।

INDEPENDENCE DAY: 24 जुलाई 1947, दक्षिण भारत की कुप्रथा देवदासी पर लगा था प्रतिबंध
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 24 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। अभी तक आपने 23 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि इस दिन सीमा आयोग की रिपोर्ट में रजवाड़ों को आमंत्रित किया गया था लेकिन मुस्लिम लीग को नहीं इससे मुस्लिम लीग की चिंता बढ़ गई। ने वायसराय को चिट्ठी लिखी कि दो दिन चलने वाली रजवाड़ों की इस बैठक में मुस्लिम लीग को भी शामिल किया जाए, इस पर वायसराय ने कहा कि इस लीग में उन्होंने पटेल और नेहरू को भी नहीं बुलाया। पंजाब में सीमा रिपोर्ट पर एक बैठक हुई जिसमें कहा गया कि ननकाना साहब को पंजाब में शामिल किया जाए। दूसरी तरफ शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष ज्ञानी करतार सिंह ने कहा कि पंजाब की सीमा ऐसी रखी जाए कि सिखों के सारे धर्मस्थल उसमें आ जाएं।
24 जुलाई 1947 का दिन बहुत ही अहम था। विभाजन परिषद में भारत-पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने घोषणा कि इसको जो फैसला होगा उन्हें पूरी तरह स्वीकार होगा। माउण्ट बेटेन को इस स्वीकृति से हैरानी थी कि दोनो तरफ के नेताओं ने उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए। मद्रास में देवदासी प्रथा के बारे में एक आदेश जारी हुआ, जिसका स्वागत भी हुआ और विरोध भी। दक्षिण भारत की इस कुप्रथा को बंद करने में बहुत से ब्राहमणवादी संगठन एकत्रित हो गए, और इसका जमकर विरोध किया।
कौन थीं देवदासी-
देवदासी हिन्दू धर्म में ऐसी स्त्रियों को कहते हैं जिनका "विवाह" मन्दिर या अन्य किसी धार्मिक प्रतिष्ठान से कर दिया जाता है। समाज में उन्हे उच्च स्थान प्राप्त होता है और उनका काम मंदिरों की देखभाल तथा नृत्य तथा संगीत सीखना होता है । परंपरागत रूप से वे ब्रह्मचारी होती हैं पर अब उन्हे पुरुषों से संभोग का अधिकार भी रहता है । यह एक अनुचित और गलत सामाजिक प्रथा है । इसका प्रचलन दक्षिण भारत में प्रधान रूप से था। धर्म की आड़ में महिलाओं के साथ पुरुष अपना जुल्म ढाते थे। क्योंकि इनके लिए नाम देवदासी दिया गया था तो बाहरी लोग भगवान से डरकर इनपर होने वाले अत्याचारों का विरोध नहीं कर पाते थे।
नीचे की स्लाइड्स में जानें महिलाओं के अधिकारों को लेकर पूरी दुनिया में बड़े स्‍तर पर आंदोलन हो रहे थे-

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