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INDEPENDENCE DAY: 24 अगस्‍त 1947 को पंजाब हिंसा की रिपोर्ट आई, हजारों लोगों ने गंवाई जान

विभाजन के दौरान पंजाब में हुए हिंसा में हजारों लोगों की जान गई- रिपोर्ट

INDEPENDENCE DAY: 24 अगस्‍त 1947 को पंजाब हिंसा की रिपोर्ट आई, हजारों लोगों ने गंवाई जान
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 24 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 23 अगस्त 1947 को जवाहर लाल नेहरू समेत देश के तमाम जनप्रतिनिधि देश में कई जगहों पर झंडा न फहराये जाने और स्‍वतंत्र भारत की नई रूपरेखा को लेकर चिंतित थे। इसके अलावा सभी विभाजन के कारणों पर भी चर्चा की। सभी बड़े नेता इस बात के लिए चिंतित थे कि आजादी के इतने दिनों बाद भी बहुत सी जगह पर भारतीय झंडे नही फहराये गये। पूरे देश में पलायन के कारण लोगों में रोष फैला हुआ था अफरातफरी का दौर जारी था। कश्‍मीर का मसला भी हल नहीं हुआ था। स्वतंत्र भारत में त्रासदी का ऐसा दौर चल रहा था जिसमें 400 मिलियन से ज्यादा लोग, 250 मिलियन हिन्दू 90 मिलियन मुस्लिम 6 मिलियन सिख आदि अपने घरों से बेघर थे।
आज हम आपको बताएंगे कि 24 अगस्त 1947 के दिन पंजाब हिंसा की रिपोर्ट आती है जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि विभाजन के दौरान पंजाब में हुए हिंसा में हजारों लोगों की जान गई थी। इस हिंसा में हिंदू- मुस्लिम दोनों समुदायों की मौत हुई थी। मरने वालों में अधिकतर मुस्लिम थे। हिंसा का कारण था दोनों समुदायों के बीच पंजाब का विभाजन। हिंदू-सिक्ख चाहते थे कि पंजाब भारत में रहे और मुस्लिम चाहते थे कि सिंध के साथ पंजाब भी पाकिस्तान के हिस्से में आ जाए। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया था कि जिन्ना और नेहरू पहले से ही ये जानते थे कि बंटवारे के वक्त पंजाब में बड़ी हिंसक घटनाएं जरूर घटेगी बावजूद इसके वहां सुरक्षा के पुख्चा इंतजाम नहीं किए गए थे।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, पंजाब हिंसा के बाद नेहरू का खुलासा -
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