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INDEPENDENCE DAY: 23 अगस्‍त 1947 देश की तत्‍कालीन परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे जनप्रतिनिधि

आजादी के बाद भी बहुत सी जगह पर भारतीय झंडे नही फहराये गये थे।

INDEPENDENCE DAY: 23 अगस्‍त 1947 देश की तत्‍कालीन परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे जनप्रतिनिधि
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 19 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 22 अगस्त 1947 को प्रफुल्ल चंद्र सेन और प. गोविंद बल्लभ पंत ने संसद की असेंबली में शपथ ली। इस दिन संसदों में विभिन्न क्षेत्र में संशोधन और नई नीतियो को पर बहस हुई। वी.टी कृष्णामाचारी ने संसद को संबोधित किया और अस्ट्रेलिया के हाईकोर्ट के जजमेंट को ग्रहित करने के संशोधन को उचित माना।संसद में वेस्ट बंगाल के मुस्लिम सांसद नजीरूद्दीन अहमद ने सुरक्षा के मामले को लेकर बात की और तीनों तरह जल, थल और वायु सेना की सेना की शक्ति बढ़ाने की बात की।

आज हम आपको बताएंगे कि 23 अगस्त 1947 के दिन जवाहर लाल नेहरू समेत देश के तमाम जनप्रतिनिधि देश में कई जगहों पर झंडा न फहराये जाने और स्‍वतंत्र भारत की नई रूपरेखा को लेकर चिंतित थे। विभाजन के कारणें पर भी चर्चा हुई। आजादी के बाद भी बहुत सी जगह पर भारतीय झंडे नही फहराये गये थे। पलायन के कारण लोगों में रोष फैला हुआ था अफरातफरी का दौर जारी था। कश्‍मीर का मसला भी हल नहीं हुआ था। स्वतंत्र भारत में त्रासदी का ऐसा दौर चल रहा था जिसमें 400 मिलियन से ज्यादा लोग, 250 मिलियन हिन्दू 90 मिलियन मुस्लिम 6 मिलियन सिख आदि अपने घरों से बेघर थे।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, देश का बड़ी आबाजी असमंजस में थी -
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