Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

INDEPENDENCE DAY: 21 जुलाई 1947 को संघ प्रमुख को राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव हुआ था खारिज

पंजाब के कई गांवों में हिंदू-मुस्लिम दंगों ने वायसराय और गवर्नर की चिंता बढ़ा दी थी।

INDEPENDENCE DAY: 21 जुलाई 1947 को संघ प्रमुख को राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव हुआ था खारिज
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 21 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 20 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि फ्रंटियर की रायशुमारी का परिणाम आता है जो पाकिस्तान के हिस्से में जाता है। इस फैसले के आने के बाद गैर-मुस्लिम कर्मचारी फ्रंटियर में काम करने से मना कर देते हैं। दूसरी तरफ लाहौर में सरदार हरनाम सिंह चिनाव नदी को पंजाब की सीमा बनाने की मांग करते हैं। इसके अलावा लाहौर में चार बम धमाके हुए थे, जिसमें कई लोग मारे गए। दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति एक प्रस्ताव के दौरान कहती है कि यह आजादी हमें अधूरी मिली है और असली आजादी अभी मिलना बाकी है।
अब हम आपको 21 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। पंजाब के कई गांवों में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़कने की घटनाओं ने भारत के वायसराय लार्ड माउंटबेटन और गवर्नर जिनकिंस की सिरदर्दी को बढ़ा दिया था। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि इन हिंसात्मक घटनाओं पर काबू कैसे पाया जाए। दोनों की चिंता का बढ़ने का एक कारण यह भी था कि इन दोनों ने इस हिंसा की आग को खूद अपनी आंखों से देखा था, जब ये दोनों दिल्ली से लाहौर जा रहे थे। इसके अलावा उन्हें मिलने वाली रिपोर्टों में भी केवल हिंसा की ही खबरें आ रही थीं। कई अखबार तो आधा शहर जलकर राख होने की खबरों से भरे पड़े थे।
इधर, दिल्ली में नेहरू संविधान सभा में भारत गणराज्य के संविधान का मसौदा पेश करते हैं जिसमें एक खास प्रावधान यह था कि संघ प्रमुख को राष्ट्रपति कहा जाएगा, उसका चुनाव हो और उसका कार्यकाल पांच साल का हो। लेकिन इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया गया क्योंकि ज्यादातर नेताओं की इस पर एक राय नहीं थी।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, नेहरू कलकत्ता को लेकर क्यों चिंतित थे -
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-
Next Story
Top