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INDEPENDENCE DAY: 2 सितंबर 1947 को महात्‍मागांधी ने नोआखली यात्रा का विचार त्‍यागा, लोगों से की शांति की अपील

इन दिनों कलकत्‍ता समेत देश के कई हिस्‍सो में सांप्रदायिक हिंसा फैली हुई थी।

INDEPENDENCE DAY: 2 सितंबर 1947 को महात्‍मागांधी ने नोआखली यात्रा का विचार त्‍यागा, लोगों से की शांति की अपील

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 2 सितंबर 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 1 सितंबर 1947 को महात्‍मा गांधी ने 72 घंटे के बाद अपना अनशन तोड़ा। गांधी हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए अनशन पर थे। देश में आजादी के पहले ही कई प्रांतों में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने लगी थी। आजादी के दिन यानी 15 अगस्‍त को भी गांधी अनशन पर ही थे। इस दिन गांधी दिल्‍ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल नोआखली में अनशन पर थे।

वे हिंदू और मुसलमानों के बीच हो रहे दंगे से आहत थे। इसी दिन भारतीय मानक समय (आईएसटी)की आधिकारिक घोषणा हुई। गांधी आजादी के जश्‍म में शामिल नहीं थे। वे देश में हो रही सांप्रदायिक हिंसा को ले‍कन चिंचित थे। इन दिनों कलकत्‍ता में हिंसा फैली थी। 1 सितंबर 1947 को पीबीएफ का अंत हो गया था। पीबीएफ में सभी समुदाय के 55 हजार सैनिक शामिल थे जो देश में सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए 1 अगस्‍त से 1 सितंबर तक वजूद में रही।

2 सितंबर 1947 को कलकत्‍ता हाउस में गांधी के इर्द-दीर्ध भारी भीड़ थी। गांधी ने नोआखली यात्रा का विचार त्‍याग दिया। इस मौके पर उन्‍होंने कलकत्‍ता में फैली सांप्रदायिक हिसा को रोकने के लिए लोगों से शांति की अपील की। इन दिनों कलकत्‍ता समेत देश के कई हिस्‍सो में सांप्रदायिक हिंसा फैली हुई थी। गांधी आजादी भारत की यह सांप्रदायिक तस्‍वीर देखकर दुखी थे। इधर दिल्‍ली में भी हिंसा की कुछ घटनाओं की खबर थी।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, खराब थे अल्‍पसंख्‍यकों के हालात-
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