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INDEPENDENCE DAY: 19 जुलाई 1947 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मंत्रियों के नाम की हुई घोषणा

कांग्रेसी नेता कुर्सी के लालच में जोड़-तोड़ की राजनीति कर रहे थे, गांधी इस बात से दुखी थे।

INDEPENDENCE DAY: 19 जुलाई 1947 को कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मंत्रियों के नाम की हुई घोषणा

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 19 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 18 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि महाराजा जार्ज 6 के प्रतिनिधि हाउस ऑफ लार्ड्स में आते हैं और वहां मौजूद सभी सांसदों को इस बात से अवगत कराते हैं कि उन्होंने इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को मंजूरी दे दी है। भारत अब ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं रह जाता है और उसकी जगह पर विश्व मानचित्र पर दो नए देश उभर कर आते हैं, भारत और पाकिस्तान। इस जरूरी जानकारी के रूप में हर भारतीय या पाकिस्तानी को याद रखनी चाहिए कि जब ये बिल ब्रिटिश सांसदों को सुनाया जाता है तो उस समय टाइम हो रहा था शाम चार बजकर दस मिनट और रात 12 बजकर एक मिनट से यह कानून लागू हो जाता है।

अब हम आपको 19 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है।वायसराय ने एक आदेश जारी कर के भारत और पाकिस्‍तान के लिए अलग-अलग अंतरिम सरकार का गठन कर दिया। इसी दिन माउंटवेटन ने वायसराय को प्राथमिकता देते हुए यह घोषण भी कर दी की इन मंत्रीमंडलों की बैठक अलग-अलग होंगी लेकिन किसी विवाद की स्थिति में वायस राय का फैसला दोनों को मानना होगा।

इस मौके पर जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आजाद, भावा बलदेव सिंह और जगजीवन राम को कांग्रेस सरकार में मंत्री बनाया गया। मुस्लिम लिग के मंत्रियों की भी घोषणा हुई। उधर माहात्‍मा गांधी इस बात से चिंतित थे कि कांग्रसे में पद की लालसा में कई कांग्रसी नेता जोड़-तोड़ की राजनीति कर रहे हैं। गांधी ने अपनी प्रार्थना सभा में इस प्रवृति की आलोचना की और कहा कि भविष्‍या में इसके भयंकर परिणाम होंगे।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, 19 जुलाई 1947 को और क्‍या महत्‍वपूर्ण फैसले हुए-
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