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INDEPENDENCE DAY: 19 अगस्‍त 1947 दुविधा में थे कश्‍मीर के महाराज, सक्रिय हो रहे थे पाक आक्रमणकारी

अभी कश्‍मीर के महाराज ने तय नहीं किया था कि वे भारत में शामिल होंगें या पाकिस्‍तान में।

INDEPENDENCE DAY: 19 अगस्‍त 1947 दुविधा में थे कश्‍मीर के महाराज, सक्रिय हो रहे थे पाक आक्रमणकारी
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 19 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि जहां पूरा देश पंद्रह अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं इसके तीन दिन बाद दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट के निवासी ने 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। दरअसल वर्तमान दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट सहित कई इलाके 18 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुए थे। 15 अगस्त 1947 को देश ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ, लेकिन बालुरघाट सहित पश्चिम बंगाल के कई इलाके 17 अगस्त 1947 तक पाकिस्तान के अंतर्गत थे। तत्कालीन हिन्दु महासभा के अध्यक्ष व जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कड़ी लड़ाई लड़ कर 18 अगस्त 1947 को बालुरघाट पाकिस्तान से मुक्त कराकर भारत में शामिल किया।

19 अगस्‍त 1947 तक यह तय नहीं हुआ था कि कश्‍मीर का विलय भारत में होगा या पाकिस्‍तान में। आजाद भारत की रूपरेखा कैसी हो इस पर नेहरू, गांधी, पटेल, राजेन्‍द्र प्रसाद समेत सभी नेता विचार कर रहे थे। कई रियासतों ने अभी तय नहीं किया था कि वे पाकिस्‍तान में शामिल होंगे यार हिंदुस्‍तान में। रियासतों के मुखिया दानों की देशों के नेताओं के सम्‍पर्क में थे और अपनी- अपनी आशंकाएं जता रहे थे। कश्‍मीर और हैदराबाद ने भी अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया था। अभी कश्‍मीर के महराज ने तय नहीं किया था कि वे भारत में शामिल होंगें या पाकिस्‍तान में। कश्‍मीर को पाकिस्‍तान में शामिल करने की मंशा रखने वाले कई ग्रुप सक्रिय थे और कश्‍मीर पर कब्‍जा जमाने के लिए हमले कि तैयारी में थे। 19 अगस्‍त तक तय नहीं हुआ था कि कश्‍मीर पाकिस्‍तान का हिस्‍सा बनेगा या भारत में शामिल होगा।

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