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INDEPENDENCE DAY: 18 जुलाई 1947 को जॉर्ज 6 ने दी थी भारत-पाकिस्तान को मंजूरी, माउंटबेटन को था डर

जॉर्ज 6 शाम चार बजकर दस मिनट पर इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को अपनी मंजूरी दे देते हैं।

INDEPENDENCE DAY: 18 जुलाई 1947 को जॉर्ज 6 ने दी थी भारत-पाकिस्तान को मंजूरी, माउंटबेटन को था डर
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 18 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 17 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि दिल्ली में भारतीय संविधान सभा में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हंगामा होता है। लीगी चाहते हैं कि भारत का संविधान स्विस मॉडल पर आधारित हो लेकिन सभी कांग्रेसी नेता लीग के इस प्रस्ताव को खारिज कर देते हैं और ब्रिटेन संसदीय प्रणाली को अपनाने की बात सामने रखते हैं। इस सभा में एक और महत्वपूर्ण घटना घटती है कि हिंदी को राष्ट्र भाषा की मान्यता दे दी जाती है और इसकी लिपि हिंदी रखी जाती है।
दूसरी तरफ गांधी, नेहरू और जिन्ना से कहते हैं कि वो फील्ड मार्शल को पत्र लिखकर दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अत्याचार को रोकने की मांग करें। उधर, लीगी और कांग्रेसी दोनों कलकत्ता को अपने हिस्से में देने की मांग सीमा आयोग से करते हैं।
अब हम आपको 18 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। शाम चार बजे महाराजा जार्ज 6 के प्रतिनिधि हाउस ऑफ लार्ड्स में आते हैं और वहां मौजूद सभी सांसदों को इस बात से अवगत कराते हैं कि उन्होंने इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को मंजूरी दे दी है। भारत अब ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं रह जाता है और उसकी जगह पर विश्व मानचित्र पर दो नए देश उभर कर आते हैं, भारत और पाकिस्तान। इस जरूरी जानकारी के रूप में हर भारतीय या पाकिस्तानी को याद रखनी चाहिए कि जब ये बिल ब्रिटिश सांसदों को सुनाया जाता है तो उस समय टाइम हो रहा था शाम चार बजकर दस मिनट और रात 12 बजकर एक मिनट से यह कानून लागू हो जाता है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, माउंटबेटन को किस बात का डर था -
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