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INDEPENDENCE DAY: 17 जुलाई 1947 को तय हुई थी राष्ट्रभाषा, संसद का मॉडल और कलकत्ता विभाजन

संसद में 32 के मुकाबले 63 मतों से हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दे दिया जाता है और इसकी लिपि देवनागरी रखी गई।

INDEPENDENCE DAY: 17 जुलाई 1947 को तय हुई थी राष्ट्रभाषा, संसद का मॉडल और कलकत्ता विभाजन
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नई दिल्ली.INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 17 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 16 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को ब्रिटिश संसद के दूसरे सदन हाउस ऑफ लार्ड्स में भी मंजूरी मिल जाती है। इस बिल को लिस्टूअल ने पेश किया था। पाकिस्तान में एक नई पार्टी का उदय होता है, पाकिस्तान कम्यूनिस्ट पार्टी, जिसके पहले अध्यक्ष के रूप में सरदार तेजा सिंह को चुना जाता है। दू्सरी तरफ वायसराय लिस्टूअल को एक पत्र लिखकर भारत की आजादी का दिन तय करते हैं- 14 अगस्त, रात 12 बजकर एक मिनट।
अब हम आपको 17 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। दिल्ली में भारतीय संविधान सभा की बैठक में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच जोरदार हंगामा होता है। मुस्लिम लीग चाहती है कि भारत का मॉडल स्विस संसद मॉडल पर आधारित हो लेकिन सभा में मौजूद सभी कांग्रेसी नेता उनके इस प्रस्ताव को खारिज कर कर देते हैं। बैठक में कांग्रेस लोकतंत्र की संसदीय प्रणाली मानने की दलील देती है, जो ब्रिटेन संसदीय प्रणाली पर ही आधारित थी।
संविधान सभा का आज का दिन इस लिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि आज ही के दिन (17 जुलाई) हिंदी को राष्ट्र भाषा के रूप में मान्यता दी जाती है। संसद में 32 के मुकाबले 63 मतों से हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दे दिया जाता है और इसकी लिपि देवनागरी रखी गई।
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