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INDEPENDENCE DAY: 17अगस्‍त 1947 को हुआ था भारत-पाक सीमा का निर्धारण

रेडक्लिफ कमीशन में चेयरमेन रेडक्लिफ थे जबकि दो सदस्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस तथा दो सदस्य मुस्लिम लीग से लिए गए।

INDEPENDENCE DAY: 17अगस्‍त 1947 को हुआ था भारत-पाक सीमा का निर्धारण
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 17 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 16 अगस्‍त 1947 को देश में चारों तरफ आजादी का माहौल था, हर कोई बहुत खुश था। लोग गलियों और मुहल्लों में ढोल नंगाड़े बजा रहे थे। आजाद भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा पहली बार काउंसिल हाउस (संसद भवन) पर 10:30 बजे 15 अगस्त, 1947 को फहराया गया। क्योंकि 15 अगस्त को नेहरू जी व अन्य नेता राज-काज के कामों में व्यस्त थे। व्यस्तता के चलते ही लालकिले पर जवाहर लाल नेहरू ने पहली बार 16 अगस्त को सुबह 8.30 बजे तिरंगा फहराया। अभी तक भारत और पाकिस्तान भले ही अलग-अलग आजाद मुल्क बन गए थे लेकिन उनकी सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था। महात्मा गांधी दिल्ली से दूर बंगाल में लोगों के झगड़े शांत करा रहे थे। सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उनको स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली आने का खत भिजवाया लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया।
दुनिया के इतिहास में रेडक्लिफ रेखा के नाम से मशहूर विभाजक लाइन आज ही के दिन 17 अगस्त 1947
को भारत को पाकिस्तान के बीच खींची गई थी। इस विभाजक रेखा के जरिए ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर सिरिल रेडक्लिफ ने गुलाम भारत के 9 करोड़ लोगों के बीच साढ़े लाख किलोमीटर की रेखा खींच कर दो हिस्सो भारत और पाकिस्तान में बांट दिया था। दोनों राष्ट्रों को बांटने वाली एक अस्थायी रेखा पहले ही लॉर्ड वावेल द्वारा फरवरी 1947 में बना दी गई थी। परन्तु इस अस्पष्ट विभाजन को कोई बंगाल और पंजाब में हिन्दुओं, मुस्लिमों और सिखों की लगभग बराबर की संख्या को देखते हुए फिर से बनाने के लिए रेडक्लिफ कमीशन बनाया गया।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, रेडक्लिफ लाइन का निर्धारण करने में रखी गई थी गोपनीयता-

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