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INDEPENDENCE DAY: 16अगस्‍त 1947 को नेहरू ने लाल किले पर फहराया था तिरंगा

16अगस्‍त 1947 को देश में चारों तरफ आजादी का माहौल था, हर कोई बहुत खुश था।

INDEPENDENCE DAY: 16अगस्‍त 1947 को नेहरू ने लाल किले पर फहराया था तिरंगा
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 16 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 15 अगस्‍त 1947 को नेहरू ने प्रधानमंत्री के तौर पर देश के नाम अपना पहला संबोधन किया। नेहरू के इस भाषण को 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' के नाम से ही जाना जाता है। पाकिस्तान के बनने से कुछ क्षण पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने भी अपने देशवासियों को संबोधित किया था। नेहरू ने कहा, आज हम दुर्भाग्य के एक युग का अंत कर रहे हैं और भारत पुनः खुद को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मन रहे हैं, वो महज एक कदम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी जीत और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं।
आज हम आपको बता रहे हैं कि 16अगस्‍त 1947 को देश में चारों तरफ आजादी का माहौल था, हर कोई बहुत खुश था। लोग गलियों और मुहल्लों में ढोल नंगाड़े बजा रहे थे। आजाद भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा पहली बार काउंसिल हाउस (संसद भवन) पर 10:30 बजे 15 अगस्त, 1947 को फहराया गया। क्योंकि 15 अगस्त को नेहरू जी व अन्य नेता राज-काज के कामों में व्यस्त थे। व्यस्तता के चलते ही लालकिले पर जवाहर लाल नेहरू ने पहली बार 16 अगस्त को सुबह 8.30 बजे तिरंगा फहराया।
अभी तक भारत और पाकिस्तान भले ही अलग-अलग आजाद मुल्क बन गए थे लेकिन उनकी सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हुआ था। महात्मा गांधी दिल्ली से दूर बंगाल में लोगों के झगड़े शांत करा रहे थे। सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उनको स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली आने का खत भिजवाया लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, बंगाल में चल रहे दंगों की वजह से महात्मा गांधी ने दिल्ली आने से किया था इंकार-

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