Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

INDEPENDENCE DAY: 15 जुलाई 1947 को मंजूर हुआ इंडियन इंडिपेंडेंस बिल, ब्रिटिश पीएम भी हुए दुखी

इंग्लैंड के प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता हैरल्ड मैकमिलन को इस विभाजन का दुख था।

INDEPENDENCE DAY: 15 जुलाई 1947 को मंजूर हुआ इंडियन इंडिपेंडेंस बिल, ब्रिटिश पीएम भी हुए दुखी
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 15 जुलाई 1947 के दिन को हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 14 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि सभी बड़े नेता 15 अगस्त के आस-पास हिंसा भड़कने की आशंका से परेशान और चिंतित थे। दूसरी तरफ पंजाब के गवर्नर जिनकिंस ने हिंसा की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका से माउंटबेटन को अवगत कराते हुए पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने माउंटबेटन को बताया कि पूर्वी पंजाब में मुसलमान और पश्चिम पंजाब में गैर-मुस्लिम रहना नहीं चाहते हैं। सिक्ख न तो हिंदू और न ही मुस्लिम पर भरोसा करता है। हिंसा को नियंत्रित रखने के लिए जम्मू के दस अखबारों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा इंग्लैंड के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने घोषणा की कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह भारत का हिस्सा है। उधर, दिल्ली में संविधान सभा का चौथा अधिवेश शुरू हुआ था, जिसमें मौलवी अजीज अहमद और नजरूद्दीन अहमद ने अल्पसंख्यकों का मुद्दा संविधान में शामिल करने की मांग की थी।
अब हम आपको 15 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। करीब पौने चार घंटे की बहस के बाद हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को बिना मत विभाजन के मंजूरी मिल गई। बहस के दौरान साफ तौर पर कहा गया कि ब्रिटेन रियासतों को अलग से मान्यता नहीं देगा और ये कि गवर्नर जनरल मंत्री परिषद की सलाह पर काम करेंगे।
आज ही के दिन (15 जुलाई) को इस बात का खुलासा हुआ कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता हैरल्ड मैकमिलन का मानना था कि भारत और पाकिस्तान बहुत दिनों तक अलग-अलग नहीं रह सकेंगे और एक ही हो जाएंगे। उन्होंने एक देश के दो टुकड़े होने का भी दुख था।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, आज के दिन भारत से पहली ट्रेन पाक के लिए रवाना हुई थी -
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि और हमें फॉलो करें ट्विटर पर-
Next Story
Top