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INDEPENDENCE DAY: 14 जुलाई 1947 को सीमा आयोग की रिपोर्ट आई, जम्मू में दस अखबारों पर रोक लगी

पंजाब में सिक्ख, हिंदू और मुसलमान दोनों पर यकीन नहीं कर रहे थे।

INDEPENDENCE DAY: 14 जुलाई 1947 को सीमा आयोग की रिपोर्ट आई, जम्मू में दस अखबारों पर रोक लगी
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 14 जुलाई 1947 के दिन को हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 13 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि सिलहट की रायशुमारी का परिणाम आ चुका था जिससे इस बात का रास्ता साफ हो गया था कि सिलहट अब पूर्वी बंगाल में शामिल हो जाएगा। हालाकि नेहरू ने माउंटबेटन को तार लिखकर इस बात से अवगत कराया था कि सिलहट में चुनाव के दौरान बहुत गड़बड़ियां हुई हैं। इसके अलावा माउंटबेटन ने लिस्टूअल को पत्र लिखकर कहा कि पंजाब का विभाजन 15 अगस्त के बाद किया जाएगा। तो दूसरी तरफ पाकिस्तान में जिन्ना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि पाक में सभी अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी, उनकी इस बात का गांधी ने भी स्वागत किया।
अब आगे हम आपको 14 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। माउंट बेटेन, गांधी, नेहरू, जिनकिंंस और जिन्ना सब लोग बहुत परेशान और चिंतित थे कि 15 अगस्त के आस-पास और खासतौर पर सीमा आयोग की रिपोर्ट के आने के बाद देश में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क सकते हैं। पंजाब के गवर्नर जिनकिंस ने परेशान होकर वायसराय माउंटबेटन को एक तार भेजा जिसमें उन्होंने लिखा था कि मुसलमान पूर्वी पंजाब में और गैर-मुस्लिम पश्चिम पंजाब में रहने और काम करने को लेकर काफी घबराए और अहसाय महसूस कर रहे हैं। सिक्ख हिंदू और मुसलमान दोनों पर यकीन नहीं करते हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि सत्ता हैंडओवर करते समय यहां बड़ी हिंसा की घटनाएं घट सकती हैं।
हिंसा की स्थिति पर काबू पाने के लिए जम्मू में दस अखबारों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई ताकि कोई भी खबर आम लोगों तक न पहुंच सकें और दंगे भड़ने की आशंक में कमी लाई जा सके।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, पंजाब में हिंसा रोकने के लिए क्या किया गया -
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