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INDEPENDENCE DAY: 14 अगस्‍त 1947 को पाकिस्तान की आजादी पर पंजाब में हिंसा, 55 हजार सैनिक हो गए थे फेल

पंजाब में सुरक्षा के मद्देनजर 55 हजार सेना की नियुक्ति की गई ताकि कोई हिंसात्मक घटना न घटे।

INDEPENDENCE DAY: 14 अगस्‍त 1947 को पाकिस्तान की आजादी पर पंजाब में हिंसा, 55 हजार सैनिक हो गए थे फेल
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 14 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 13 अगस्‍त 1947 लाहौर में स्थिति उग्र हो गई थी। इस हिंसा में सैकड़ों मासूमों की जान गई और लाखों की संपत्ति जल कर खाक हो गई। तो दूसरी तरफ कराची में जिन्ना पाकिस्तान की आजादी का जश्न मनाते हैं और माउंटबेटन के साथ मिलकर जमकर शराब का सेवन करते हैं। इधर, भारत में कुछ अच्छी तो कुछ बुरी खबर आती है बुरी खबर यह थी कि हैदराबाद के निजाम घोषणा करते हैं कि वो अपनी रियासत का विलय भारत में नहीं करेंगे और अच्छी खबर पर ज्ञात करें तो ग्वालियर, वड़ोदरा, पटियाला और फरीदकोट भारत में अपने विलय की घोषणा की।
अब हम आपको 14 अगस्त 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारतीय आजादी के इतिहास में किस तरह यादगार रहा है। इस दिन पंजाब में सुरक्षा के मद्देनजर 55 हजार सेना की नियुक्ति की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की कोई हिंसात्मक घटना न घटे लेकिन इतनी बड़े सुरक्षा इंतजाम करने के बावजूद हिंसा नहीं रूकी।
दिल्ली में तिरंगा और कराची में पाकिस्तान के झंड़े चारों ओर सड़कों और खंभों पर लगाए गए थे और लोग जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। दोनों तरफ बच्चे, आदमी और औरत सभी सड़कों पर उतर आए थे और जुलूस निकाल रहे थे। जुलूसों का हाल तो ये था कि ये पता ही नहीं चल रहा थी कि कब एक खत्म हो रहा है और कब दूसरा शुरू हो गया।
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