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INDEPENDENCE DAY: 13 जुलाई 1947 को सिलहट का फैसलाः पूर्वी बंगाल में हुआ शामिल

माउंटबेटन ने पत्र लिखकर सबसे पहले लिस्टूअल को इस बात की जानकारी दी कि सिलहट की रायशुमारी का फैसला हो गया है।

INDEPENDENCE DAY: 13 जुलाई 1947 को सिलहट का फैसलाः पूर्वी बंगाल में हुआ शामिल
नई दिल्ली.INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 13 जुलाई 1947 के दिन को हमारे लिए जानना क्यों जरूरी है। आपने 12 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान का गवर्नर जनरल बनने के साथ ही अपने लिए लार्ड माउंटबेटन से विशेष अधिकारों की मांग की। दूसरी तरफ माउंटबेटन ने लिस्टुअल को तार लिखकर बताया कि वो नेहरू और जिन्ना की उस राय से सहमत हैं जिसमें उन्होंने 15 अगस्त के बाद भी कुछ ब्रिटिश सैनिकों को भारत में रहने देने की मांग की है। उधर, गांधी ने अपनी शांति सभा में कहा था कि गवर्नर जनरल बनना जिन्ना के लिए एक चुनौती साबित होगी। इसके अलावा उन्होंने भारत के गवर्नर जनरल माउंटबेटन पर भरोसा रखने को कहा था और माउंटबेटन के लिए इसे एक इम्तेहान बताया था।
अब आगे हम आपको 13 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारत की आजादी के रूप में किस तरह यादगार है। गौर हो कि, सिलहट के लिए वोटिंग कराई गई थी कि ये भारत में जाएगा या पाकिस्तान में। इसी रायशुमारी का नतीजा आज के दिन (13 जुलाई) आया और लार्ड माउंटबेटन ने फौरन लार्ड लिस्टूअल को तार भेजा कि सिलहट की रायशुमारी का फैसला आ गया है और सिलहट ने तय कर लिया है वो पूर्वी बंगाल में शामिल होंगा। आप इसकी घोषणा 14 जुलाई को कर दें और चाहें तो असम के प्रधानमंत्री गोपीनाथ वरदुलई को इसकी सूचना, घोषणा करने से पहले दे दें, ताकि वो इसकी पूरी तैयारियां कर लें और किसी भी प्रकार की हिंसात्मक घटना पर समय रहते काबू पा सकें।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, नेहरू ने माउंटबेटन को पत्र लिखकर किस गड़बड़ी की जानकारी दी थी -
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