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INDEPENDENCE DAY: 12 जुलाई 1947 को जिन्ना ने गवर्नर जनरल के विशेष अधिकार मांगे

अंतरिम सरकार पर जिन्ना की प्रतिक्रया बहुत उत्साहजनक नहीं थी।

INDEPENDENCE DAY: 12 जुलाई 1947 को जिन्ना ने गवर्नर जनरल के विशेष अधिकार मांगे
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 12 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए क्या महत्व रखता है। आपने 11 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि सेनाओं के बंटवारे के बारे में विभाजन परिषद ने अपने अंतिम निर्णय की घोषणा कर दी थी और ये काम दो चरणों में पूरा किया गया। परिषद ने कहा, पहला बंटवारा सांप्रदायिक आधार किया जाएगा और दूसरा लोगों की पसंद की आधार पर। परिषद ने पहले चरण में थल सेना और नौ सेना के एक हिस्से का बंटवारा किया। जिसके तहत भारत को 32 और पाकिस्तान को 16 बंदरगाह और दो-दो पिकेट मिले। थल सेना में भारत के हिस्से में आईं 15 इंफेन्ट्री रेजीमेंट और पाकिस्तान के हिस्से में आठ इंफेन्ट्री रेजीमेंट सेना। तूफाना रेजीमेंट के बंटवारे में थोड़ी मुश्किलें आईं लेकिन अंततः फैसला हो ही गया। भारत को 18.5 और पाकिस्तान को साढ़े आठ रेजीमेंट मिली।
अब हम आपको 12 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारतीय आजादी के इतिहास में किस तरह यादगार रहा है। मोहम्मद अली जिन्ना शाम छह बजे वायसराय हाउस पहुंचे और करीब पौने आठ बजे वहां रहे। माउंटबेटन से उनकी बातचीत हुई अंतरिम सरकार के गठन पर हैदराबाद और पंजाब पर और गवर्नर जनरल के झंडे पर। हैदराबाद के बारे में जिन्ना का कहना था कि कांग्रेस ने निजाम पर दवाब डाला तो मुसलमान भारत के सबसे पुराने मुस्लिम राजवंश के हठ पर उठ खड़े होंगे। अंतरिम सरकार पर जिन्ना की प्रतिक्रया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। माउंटबेटन ने अपनी एक स्टाफ मीटिंग में कहा कि नेहरू अंतरिम सरकार के मसौदे से संतुष्ट लगे लेकिन पटेल की प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं कही जा सकती।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, वायसराय ने एक नोट जारी किया था, जानें क्या था इस नोट में -
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