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INDEPENDENCE DAY: 11 जुलाई 1947 को ही दोनों देशों की सेना का बटवारा किया गया

भारत और पाकिस्तान का बटवारा संप्रदायिक आधार पर किया गया।

INDEPENDENCE DAY: 11 जुलाई 1947 को ही दोनों देशों की सेना का बटवारा किया गया
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 10 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए क्या महत्व रखता है। आपने 10 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि दिल्ली में संविधान सभा की एक समिति ने राष्ट्रीय झंडे में चरखे की जगह चक्र रखने की सिफारिश कर दी और कराची में सिंध एसेंबली में मुस्लिम लीग का झंडा फहराने पर कांग्रेसी नेताओं ने जमकर विरोध किया। ब्रितानी प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में चर्चा के दौरान मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना को पाकिस्तान का और लार्ड माउंटबेटन को भारत का गवर्नर जनरल घोषित कर दिया।
अब हम आपको 11 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारतीय आजादी के इतिहास में किस तरह यादगार रहा है। सेनाओं के बटवारे के बारे में विभाजन परिषद ने अपने अंतिम निर्णय की घोषणा कर दी और कहा कि ये काम दो चरणों में पूरा किया जाएगा। परिषद ने कहा कि पहला बटवार सांप्रदायिक आधार किया जाएगा और लोगों की पसंद की आधार पर किया जाएगा।
परिषद ने पहले चरण में थल सेना और नौ सेना के एक हिस्से का बटवार कर दिया। जिसके तहत भारत को 32 और पाकिस्तान को 16 जल पोर्ट और दो-दो फिगेट मिले। थल सेना में भारत के हिस्से में आईं 15 इंफेन्ट्री रेजीमेंट और पाकिस्तान के हिस्से में आठ इंफेन्ट्री रेजीमेंट सेना। तूफाना रेजीमेंट के बटवारे में थोड़ी मुश्किलें आईं लेकिन अंततः फैसला हो ही गया। भारत को साढ़े अठारह और पाकिस्तान को साढ़े आठ रेजीमेंट मिला।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, वायु सेना के बटवारे के बारे में क्या हुआ -
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