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INDEPENDENCE DAY: 11 अगस्‍त 1947 जिन्ना को कराची में पाकिस्तान का राष्ट्रपति चुना गया

पाकिस्तान में रहने वाली आवाम सारे एक देश के नागरिक होंगेः जिन्ना

INDEPENDENCE DAY: 11 अगस्‍त 1947 जिन्ना को कराची में पाकिस्तान का राष्ट्रपति चुना गया
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नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 11 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अभी आपने जाना कि 10 अगस्‍त 1947 को कराची में पाकिस्तान में संविधान सभा की पहली बैठक होती है। तो दूसरी तरफ कलकत्ता में मुस्लिम नेताओं के आग्रह पर महात्मा गांधी ने अपनी नोआखली यात्रा रद्द कर देते हैं। महात्मा गांधी नोआखली का दौरा इसलिए करना चाहते थे क्योंकि नोआखली दंगे में पांच से दस हजार लोगों की मौत हो गई थी। इन दंगों में बंगाली हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा था। दूसरी ओर पाकिस्तान बंटवारे के लिए भारत से 100 करोड़ रुपए की मांग करता है लेकिन भारत पाक को 20 करोड़ से अधिक नहीं देना चाहता है। क्योंकि भारत को डर होता है कि पाक इस धन का इस्तेमाल उसके खिलाफ हो सकता है। इसी दिन (10 अगस्त) को हिंदू महासभा ने सम्मेलन में एक प्रस्ताव पास कर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात होती है।
अब हम आपको 11 अगस्त 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारतीय आजादी के इतिहास में किस तरह यादगार रहा है। कराची में पाकिस्तान संविधान सभा में जिन्ना को बिना किसी विरोध के पाकिस्तान का राष्ट्रपति चुना लिया जाता है। जिन्ना अपने पहले भाषण में पाकिस्तान को आवाम को संबोधित करते हुए कहते है कि पाकिस्तान में आप आजाद हैं, आप चाहें तो मंदिर जाएं और चाहें तो मस्जिद। पाकिस्तान का सिद्धांत है सबके लिए एक समान नागरिक अधिकार। आपका रंग, धर्म, जात या नस्ल जो भी हो। आप कुछ दिन बाद राजनीतिक रूप से देखेंगे कि पाकिस्तान में हिंदू, हिंदू नहीं रहेंगे और मुसलमान, मुसलमान नहीं रहेंगे। सब एक देश के नागरिक होंगे।
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