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INDEPENDENCE DAY: 10 जुलाई 1947 को भारतीय झंडे में चरखे की जगह चक्र की हुई थी मांग

दिल्ली में संविधान सभा की एक समिति ने राष्ट्रीय झंडे में चरखे की जगह चक्र रखने की सिफारिश की थी।

INDEPENDENCE DAY: 10 जुलाई 1947 को भारतीय झंडे में चरखे की जगह चक्र की हुई थी मांग
नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 10 जुलाई 1947 का दिन हमारे लिए क्याद महत्व रखता है। आपने 9 जुलाई 1947 के बारे में जाना कि बंगाल में दोनों देशों की सीमा का तय होने की बैठक हुई थी। इसके अलावा बंगाल में दंगे और अधिक उग्र हो गए थे। जिसमें 17 लोग मारे गए। दूसरी तरफ खाकसार आंदोलनकारियों ने नेहरू और गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कश्मीर में भूकंप आने के वजह से गांधी का दौरा रद्द करना पड़ा।
अब हम आपको 10 जुलाई 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारतीय आजादी के इतिहास में किस तरह यादगार रहा है। भारतीय आजादी के संग्राम में आज (10 जुलाई) ही के दिन दिल्ली में संविधान सभा की एक समिति ने राष्ट्रीय झंडे में चरखे की जगह चक्र रखने की सिफारिश कर दी और कराची में सिंध एसेंबली में मुस्लिम लीग का झंडा फहराने का कांग्रेस ने जमकर विरोध किया।
ब्रितानी प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस में चर्चा के दौरान मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना को पाकिस्तान का और लार्ड माउंटबेटन को भारत का गवर्नर जनरल घोषित कर दिया गया और इसके साथ ही जिन्ना की बात ब्रिटेन सरकार ने मान ली और जिन्ना का पाकिस्तान का वजीर-ए-आलम बनने का रास्ता साफ हो गया। रियासतों के बटवारे को लेकर ब्रितानी प्रधानमंत्री का मानना था कि ये उन रियासतों पर निर्भर करता है कि वो किस ओर जाना चाहते हैं पाकिस्तान में या भारत में।
इसके बाद ब्रितान प्रधानमंत्री ने लार्ड माउंटबेटन को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें काफी खुशी हुई की उन्होंने भारत का गवर्नर जनरल बनना स्वीकार किया।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, सुरक्षित हैं बाबा रामदेव -
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