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INDEPENDENCE DAY: 1 सितंबर 1947 को 73 घंटे के बाद महात्‍मा गांधी ने अपना अनशन तोड़ा

पीबीएफ के सिपाहिओं का इंडियन नेशनल आर्मी में विलय हुआ।

INDEPENDENCE DAY: 1 सितंबर 1947 को 73 घंटे के बाद महात्‍मा गांधी ने अपना अनशन तोड़ा

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद 1 सितंबर 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अब तक आपने जाना कि 31 अगस्‍त 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पंजाब के दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ लियाकत अली और सरदार पटेल भी थे। देश के कई हिंस्‍सों में हो रही झड़पों की कुछ घटनाओं से नेहरू चिंतित थे। एक ओर जहां संविधान सभा के गठन पर बात हो रही थी तो दूसरी ओर राजनीति समेत पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कई संभावनाएं तलाशी जा रही थी।

इसी दिन लखनऊं से 31 अगस्त, 1947 के दिन 'राष्ट्रधर्म' का प्रथम अंक प्रकाशित हुआ। इस अंक की 3000 प्रतियां प्रकाशित हुईं जो हाथोंहाथ बिक गयीं तथा 500 प्रतियां और छपवानी पड़ीं। इस अंक में बाद में भारत के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी बाजपेयी की कविता छपी थी। राष्‍ट्रधर्म के पहले संपादक भी अटल बिहारी बाजपेयी ही थे। उधर कई रियासतों ने अभी तक तय नहीं किया था कि वे पाकिस्‍तान में शामिल होंगे या भारत में। देश में छुटपुट हिंसा की कुछ खबरें थीं। देश का अल्‍पसंख्‍यक दुविधा में था। जहां लोगों में आजद भारत को लेकर उल्‍लास था वहीं कई हिस्‍सों में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे।

1 सितंबर 1947 को महात्‍मा गांधी ने 72 घंटे के बाद अपना अनशन तोड़ा। गांधी हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए अनशन पर थे। देश में आजादी के पहले ही कई प्रांतों में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने लगी थी। आजादी के दिन यानी 15 अगस्‍त को भी गांधी अनशन पर ही थे। इस दिन गांधी दिल्‍ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल नोआखली में अनशन पर थे। वे हिंदू और मुसलमानों के बीच हो रहे दंगे से आहत थे। इसी दिन भारतीय मानक समय (आईएसटी)की आधिकारिक घोषणा हुई।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, पीबीएफ का हुआ अंत-

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