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INDEPENDENCE DAY: 1 अगस्‍त 1947 कश्‍मीर पहुंचे गांधी, गांधी की ट्रेन को बम से उड़ाने की खबर फैली

यह भी घोषणा हुई कि भारतीय सेना का मुख्‍यालय लाल किले में होगा।

INDEPENDENCE DAY: 1 अगस्‍त 1947 कश्‍मीर पहुंचे गांधी, गांधी की ट्रेन को बम से उड़ाने की खबर फैली
नई दिल्ली. HARIBHOOMI.COM INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज शुरू कर रहा है। आज हम आपको बता रहे हैं कि 1 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। जुलाई तक गांधी और नेहरू में से गांधी का कश्‍मीर जाना तय हो गया था। गांधी ने कश्‍मीर जाने के लिए फ्रंटियर मेल पकड़ी। उन्होंने विजय लक्ष्‍मी, राजेन्‍द्र प्रसाद, सरोजनी नायडू, खान अब्‍दुल गफ्फार खां से बात की। माउंटबेटन के प्रेस सचिव भी उनसे मिले। खान अब्‍दुल गफ्फार खां से अपनी आखिरी मुलाकात के समय गांधी ने उन से कहा आपका कर्तव्‍य वहीं जाकर पाकिस्‍तान को सचमुच पाक बनाना है। इसी बीच आधिकारिक रूप से ब्रिगेडियर केएम करियप्‍पा, मोहम्‍मद अकबर खान और राजेंद्र सिंह को मेजर जरनल बना दिया गया था।
1 अगस्‍त 1947 को खान इस जिद पर अड़े थे कि बोलन, इसीराबाद और नुस्‍की को 15 अगस्‍त के बाद उन्‍हें सौंप देना चाहिए। खान ने वायसराय को इस संबंध में चिट्ठी भी लिखी। पाकिस्‍तान खान की बात मानने को तैयार नहीं था। जिन्‍ना चाहते थे कि खान पहले पाकिस्‍तान में शामिल हों। जिन्‍ना की गैर मौजूदगी में ही वायसराय ने पाकिस्‍तान सरकार की बैठक की। बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई की 14 तक के लिए किस तरह की व्‍यवस्‍था होगी। उधर प्रधानमंत्री खान इस्‍तीफा न देने की जिद पर अड़े थे। वायसराय ने जिन्‍ना, लियाकत और पटेल से बात की। इस बातचीत में पटेल ने आदिवासियों को अपना कहा। इसे लेकर तीनों में झगड़े की नौबत आ गई। आजाद हिंद फौज के 14 कैदियों को रिहा करने के बात पर भी नेहरु और और जिन्‍ना सहमत हुए। गांधी दोपहर को श्रीनगर पहुंचे और कहा कि सरकार को तुरंत कश्‍मीर के भीतर गिलगिट के स्‍वायत्‍तता की घोषणा करनी चाहिए। 22 रियासतों ने भारत में शामिल होने की घोषणा की।
नीचे की स्लाइड्स में जानिए, गांधी के ट्रेन को बम से उड़ाने की कोशिश -
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