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INDEPENDENCE DAY: 6 जुलाई 1947 को लाल कुर्ती समर्थकों ने किया था पठानिस्तान दिवस मनाने का आह्वान

लाल कुर्ती आन्दोलन खान अब्दुल गफ्फर खान ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थन में खुदाई ख़िदमतगार के नाम से चलाया।

INDEPENDENCE DAY: 6 जुलाई 1947 को लाल कुर्ती समर्थकों ने किया था पठानिस्तान दिवस मनाने का आह्वान
नई दिल्ली. I-DAY COUNTDOWN की सीरिज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि हम भारतीयों के लिए 6 जुलाई 1947 का दिन कैसे महत्वपूर्ण रहा था। इस सीरिज में अब तक आपने पढ़ा कि कैसे अन्य दिनों की तुलना में गांधी जी सभा में अधिक लोग आए थे। लोगों को गांधी जी से उस बिल के बारे में जानना था जिसे ब्रिटिश पार्लियामेंट में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल के नाम पास किया गया था। लोगों में इस बात को जानने की उत्सुकता थी कि उनकी आजादी पर अंग्रेज कब मुहर लगाएंगे। गांधी जी ने एडविना माउंटबेटन से कहा कि ये बिल जहर है। इसका असर भारत-पाक बनने के बाद दिखाई देगा। तो दूसरी तरफ जिन्ना आजाद पाकिस्तान का गवर्नर बनने के लिए सारी तैयारियां कर चुके थे यहां तक कि लार्ड माउंटबेटन ने जिन्ना से यहां तक पूछ लिया था कि क्या मैं कराची आजाद पाकिस्तान के समारोह में आ सकता हूं।
6 जुलाई 1947 का दिन भी भारतीय इतिहास में एक अहम जगह रखता है। आज के दिन ही देश में इस बात के लिए मतदान हुए कि सिलहट असम में है या पूर्वी पाकिस्तान में। इसके लिए पश्चिम सीमा प्रांत एनडब्लयूएफपी (NWFP) और सिलहत (असम) में राय सुमारी का काम शुरू हुआ। सिलहट में मतदान केंद्र 9.30 बजे सुबह खेले, लेकिन सिलहट और अन्य मतदान केंद्र में लोगों की लंबी-लंबी कतारें सुबह से ही लग गई थी।
फ्रंटियर के हजारा और डेरा इस्माइल खान में भी मतदान केंद्रों पर उतनी भीड़ थी लेकिन यहां माहौल थोड़ा तनावपूर्ण था। तनाव की स्थिति इसलिए पैदा हुई थी क्योंकि खान अब्दुल गफ्फार खान के संगठन ‘लाल कुर्ती’ ने पठानिस्तान दिवस मनाने का एलान कर दिया था।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या था लाल कुर्ती आंदोलन -
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