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INDEPENDENCE DAY: 10 अगस्‍त 1947 को गांधी ने अपनी नोआखली यात्रा रद्द की

इस दंगे में करीब 5 से 10 हजार लोगों की मौत हुई थी और इसमें बंगाली हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा था।

INDEPENDENCE DAY: 10 अगस्‍त 1947 को गांधी ने अपनी नोआखली यात्रा रद्द की

नई दिल्ली. INDEPENDENCE DAY COUNTDOWN सीरीज के तहत आज हम आपको बताएंगे कि 10 अगस्‍त 1947 के दिन को जानना हमारे लिए क्यों जरूरी है। अभी आपने जाना कि 9 अगस्‍त 1947 को पंजाब और बंगाल सीमा आयोग के अध्यक्ष रेडक्लिफ की मोहम्मद अली जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू से अलग-अलग मुलाकात हुई। गांधी ने प्रार्थना सभा में जिन्ना के गर्वनर जनरल बनने को पाकिस्तान के लिए बेहतर बताया। सरदार पटेल ने रियासतों से कहा कि कांग्रेस ने आपकी तरफ हाथ बढ़ाया है, लेकिन वो ये बर्दाश्त नहीं करेगी कि आप जनभावनाओं को दबाएं। दूसरी तरफ दिल्ली में खाकसार आंदोलनकारियों ने नेहरू और कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए जिसमें 17 आंदोलनकारी पकड़े गए।

अब हम आपको 10 अगस्त 1947 के बारे में बताएंगे कि ये दिन भारतीय आजादी के इतिहास में किस तरह यादगार रहा है। इस दिन कराची में पाकिस्तान में संविधान सभा की पहली बैठक शुरु हुई। वहीं कलकत्ता में मुस्लिम नेताओं के आग्रह पर महात्मा गांधी ने अपनी नोआखली यात्रा रद्द कर दी। नोआखली का सांप्रदायिक दंगा कुछ महीने पहले बंगाल के नाओखली जिले में हुआ था और इसके चलते बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा और वैमनस्य फैल चुका था। इन दंगों में लोग एक-दूसरे को काट रहे थे। इस पर गांधी जी काफी दुखी थे और दंगे के बाद के हालातों का जायजा नोआखली जाकर इस लेना चाह रहे थे। इस दंगे में करीब 5 से 10 हजार लोगों की मौत हुई थी और इसमें बंगाली हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा था। वहीं इसी दिन कोल्हापुर और काठियावाड़ ने भारत में विलय की घोषणा की क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि काठियावाड़ पाकिस्तान में शामिल होना चाहता है।
इधर, वायसराय ने नेहरु को पत्र लिखा कि वे सीमा आयोग की निष्पक्षता कभी भंग करना नहीं चाहेंगे। माउंटबेटन ने एक पत्र को जिन्ना को लिखा। पाकिस्तान अपने हिस्से का 100 करोड़ रुपए चाहता है और भारत उसे 20 करोड़ रुपए से ज्यादा देने को तैयार नहीं है। सरदार पटेल जैसे नेताओं को डर था कि पाकिस्तान इस धन का उपयोग भारत के खिलाफ़ जंग छेड़ने में कर सकता है। इसके बाद गांधी ने पाकिस्तान को तुरंत धन देने की बात की। उन्हें डर था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो सीमा पर फिर से हिंसा शुरु हो जाएगी। इसी दिन हिंदू महासभा ने सम्मेलन में एक प्रस्ताव पास कर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात की।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, मुस्लिम लीग ने लिया जिन्ना को कायदे आजम खिताब देने का फैसला-
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