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गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत देगा ''पहचान पत्र''

भारतीय नागरिकता मिलने तक ये अधिकार शरणार्थियों को काफी सहूलियत देंगे।

गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत देगा
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने अपने पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थियों के लिए एक बड़ा ही अच्छा फैसला लिया है। सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को अब भारत में पहचान देने के लिए पहचान पत्र देगी। सरकार ऐसे अल्पसंख्यकों को जो पड़ोसी देश से शरणार्थी के रूप में आए हैं उन्हें भारत में बैंक खाता खोलने, कारोबार के लिए संपत्ति खरीदने और ड्राइविंग लाइसेंस, पैन और आधार कार्ड जैसे पहचान पत्र बनाने का अधिकार देने जा रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, भारत में रह रहे अल्पसंख्यक शरणार्थी जिनके पास लंबे समय का विजा (एलटीवी) है, उनके लिए बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने से उन्हें कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता मिलने तक ये अधिकार उन्हें काफी सहूलियत देंगे। लोकसभा द्वारा नागरिकता अधिनियम में संसोधन को मंजूरी दिए जाने से इन शरणार्थियों के लिए कई रास्ते खुल जाएंगे।
नरेंद्र मोदी के प्रधानमेत्री बनने से पहले बीजेपी ने कहा था कि अपने देश में उत्पीड़नों का शिकार होने के कारण भारत में आकर शरण लेने वाले गैर-मुस्लिम लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए।
आपको बता दें, इस सम्बन्ध में बीजेपी नेता भर्तहरि माहताब के नेतृत्व में गठित एक संसदीय समिति इसी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। सरकार ने कहा है कि एलटीवी लेकर भारत में रह रहे हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थी हलफनामा बनाकर दे सकेंगे। पहले जहां इन शरणार्थियों को 2 साल के लिए वीजा मिलता था, वहीँ अब 5 साल के लिए मिलेगा। साथ ही, वे शिक्षा और नौकरी जैसी सुविधाओं का भी इस्तेमाल कर सकेंगे।
इसके आलावा एलटीवी लेकर रहने वाले शरणार्थियों के बच्चे स्कूलों और कॉलेजों में विदेशी कोर्ट के अन्तर्गत दाखिला ले सकेंगे। उन्हें इसके लिए प्रदेश सरकार से अतिरिक्त अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के पास ऐसे लोगों को अपना कारोबार शुरू करने की इजाजत देने का भी अधिकार होगा। हालांकि इस बारे में कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है, लेकिन अनुमान के मुताबिक़ भारत में 2 लाख से ऊपर ऐसे सर्नार्थी हैं। इनमें से ज्यादातर पकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिन्दू और सिख समुदाय के लोग हैं।
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