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मैं चाहता हूं कि कांग्रेस भी ''कांग्रेसमुक्त'' हो- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आज की राजनीति में आई बुराइयों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।

मैं चाहता हूं कि कांग्रेस भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आज की राजनीति में आई बुराइयों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।

प्रधानमंत्री से जब उनके नारे 'कांग्रेसमुक्त भारत' के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह जब यह नारा दिए थे तो उनका आशय किसी पार्टी या संगठन विशेष से नहीं था बल्कि एक कल्चर से था जिसमें जातिवाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार, धोखा देना, सत्ता को दबोचकर रखना जैसी बुराइयां शामिल हैं।

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उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि कांग्रेस भी 'कांग्रेसमुक्त' हो। 79 मिनट लंबे इंटरव्यू में पीएम ने तमाम सवालों के जवाब दिए।

'कांग्रेसमुक्त भारत' के अपने नारे पर

कांग्रेस आज सिर्फ 4 राज्यों में सिमटकर रह गई है तो क्या कांग्रेसमुक्त भारत का उनका सपना साकार हो रहा है तो इस सवाल के जवाब में पीएम ने कहा, मेरा नारा चल पड़ा लेकिन मैं अपनी भावना नहीं पहुंचा पाया था। हमारे देश की राजनीति की मुख्य धारा कांग्रेस रही है, इसीलिए सभी दलों में कल्चर कांग्रेस वाला ही रहा। जब मैं कांग्रेसमुक्त कहता हूं तो यह किसी पार्टी या संगठन के लिए नहीं था। कांग्रेस एक कल्चर के रूप में देश में फैली हुई है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'आजादी के बाद कांग्रेस के कल्चर का जो रूप आया वह कम-अधिक मात्रा में सभी दलों को खाने लगा है। जातिवाद, परिवारवाद, भ्रष्टाचार, धोखा देना, सत्ता को दबोचकर रखना यह कांग्रेस की संस्कृति है। कांग्रेस के लोग भी कहते हैं कि कांग्रेस एक सोच है। मैं उस सोच की चर्चा करता हूं। इसलिए जब मैं कांग्रेसमुक्त कहता हूं तो मैं खुद चाहता हूं कि कांग्रेस भी खुद को कांग्रेसमुक्त कर दे। उस कल्चर से मुक्त कर दे। इस अर्थ में मैं कांग्रेसमुक्त भारत की बात करता हूं।'
उन्होने कहा, 'मैं उन बीमारियों से मुक्ति के पक्ष में हूं जो मूलतः वहीं से शुरू हुई और सभी पार्टियां कमोबेश इससे ग्रस्त हैं। मैं कांग्रेस को भी कांग्रेसमुक्त होने की बात कर रहा हूं।'

तीन तलाक विरोधी बिल के राज्यसभा में लटकने पर

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन तलाक विरोधी बिल पर कांग्रेस के रुख पर कहा कि उन्हें इससे पीड़ा हुई। शाह बानो मामले में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद द्वारा पलटे जाने की तरफ इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मैं यह मानता था कि कांग्रेस राजीव गांधी के दौर की गलती से सीखी होगी। इस देश की टीवी ने बहुत बड़ी सेवा की। तीन तलाक पीड़िताओं की दास्तां जो मीडिया में बयान हुईं, वह आंखों में आंसू ला देने वाली थीं। क्या कांग्रेस इन विचलित कर देनेवाली कहानियों से भी नहीं पिघली। अगर कांग्रेस नहीं समझ पाई तो मन में पीड़ा होती है कि राजनीति कितनी नीचे गिर गई। क्या सत्ता की ऐसी भूख होनी चाहिए कि माताओं-बहनों को कष्ट में देखते रहें लेकिन अपनी राजनीति करें। उन्हें भी शायद भीतर से पीड़ा होती होगी लेकिन राजनीति की वजह से सामने नहीं लाते होंगे।'

विदेश में देश की 'बदनामी' करने वालों पर

कुछ लोग विदेश में जाकर देश की छवि खराब करने जैसी बातें करते हैं उनके बारे में आपका क्या ख्याल है? इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे बोलने वाले की पहचान होती है, देश की नहीं।
उन्होंने कहा कि देश को तय करने दीजिए कि बाहर जाकर इस तरह बोलने से बोलने वालों की पहचान होती है या देश की।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, शायद जो लोग विदेश में रहते हैं। उन्हें पता है आज भारत के पासपोर्ट की जो इज्जत और ताकत है, शायद ही पहले कभी इतनी ताकत की अनुभूति होती होगी।'

सुप्रीम कोर्ट विवाद पर पहली बार बोले प्रधानमंत्री

न्यापालिका संकट पर पहली बार बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरकार और राजनीतिक दलों को इससे दूर रहना चाहिए।
उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायपालिका अपनी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए एक साथ बैठेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे देश की न्यायपालिका का एक बहुत ही उत्कृष्ट अतीत रहा है, वे बहुत ही सक्षम लोग हैं। वे एक साथ बैठेंगे और अपनी समस्याओं का समाधान निकालेंगे। हमारी न्यायिक प्रणाली में मेरी आस्था है, वे निश्चित तौर पर एक समाधान निकालेंगे।
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