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मानवाधिकार दिवस / इन 30 अनुच्छेदों में दर्ज मानव के महत्वपूर्ण अधिकार

आज मानवाधिकार दिवस 2018 के आवारा पर हम आपको बता रहे हैं 30 अनुच्छेदों में दर्ज महत्वपूर्ण मानवाधिकारों में हर इंसान को जन्मजात स्वतंत्रता और समानता का अधिकार हासिल है, जो इसके अनुच्छेद-1 के तहत आता है।

मानवाधिकार दिवस / इन 30 अनुच्छेदों में दर्ज मानव के महत्वपूर्ण अधिकार
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आज मानवाधिकार दिवस 2018 (Human Rights Day 2018) है। 30 अनुच्छेदों में दर्ज महत्वपूर्ण मानवाधिकारों में हर इंसान को जन्मजात स्वतंत्रता और समानता का अधिकार हासिल है, जो इसके अनुच्छेद-1 के तहत आता है। अनुच्छेद-2 में घोषणा की गई है कि हर इंसान को चाहे वह किसी भी जाति का हो, वर्ण का हो, लिंग का हो, उसकी भाषा कोई भी हो, धर्म कुछ भी हो राजनीतिक या सामाजिक विचार प्रणाली दूसरों से कितनी ही भिन्न हो लेकिन उसके साथ किसी भी देश या समाज में जन्म, संपत्ति या किसी प्रकार का ऐसा भेदभाव नहीं किया जाएगा, जो उसे कमतर इंसान होने का बोध कराए। सार्वभौम मानवाधिकारों के अनुच्छेद-3 में हर व्यक्ति को वैयक्तिक सुरक्षा तथा अनुच्छेद-4 में हर तरह की गुलामी और दासता का निषेध किया गया है। अनुच्छेद-5 में स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी व्यक्ति को शारीरिक यातना नहीं दी जाएगी और किसी के भी साथ चाहे वह अपराधी ही क्यों न हो अमानुषिक और अपमानजनक व्यवहार नहीं होगा।

हर नागरिक को कानून की निगाह में समान माना जाएगा। यह सार्वभौम मानवाधिकारों के छठवें अनुच्छेद में कहा गया है, जबकि सातवें अनुच्छेद में कहा गया है कि हर व्यक्ति को समान कानूनी सुरक्षा का अधिकार है। अनुच्छेद-9 के मुताबिक किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, न ही नजरबंद किया जा सकता है।

अनुच्छेद-11 के मुताबिक किसी अपराधी को तब तक अपने आपको गैर अपराधी मानने का हक है, जब तक कि उसके विरुद्ध अदालत में अपराध साबित न हो जाए। अनुच्छेद-13 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश की सीमाओं के भीतर स्वतंत्रतापूर्वक आने-जाने और बसने का अधिकार है।

जबकि अनुच्छेद-15 के तहत कोई भी किसी भी देश की नागरिकता हासिल कर सकता है तथा किसी भी नागरिक को उसके अपने राष्ट्र की नागरिकता से वंचित नहीं किया जा सकता।

अनुच्छेद-16 हर किसी को स्वतंत्रतापूर्वक वयस्क सहमति से किसी के साथ शादी करने का अधिकार देता है तथा किसी को भी अकेले या किसी के साथ संपत्ति रखने का अधिकार भी देता है।

सार्वभौम मानवाधिकारों के अनुच्छेद-20 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को शांतिपूर्ण ढंग से अपने विचारों को व्यक्त करने की स्वतंत्रता है तो किसी भी संस्था को यह अधिकार नहीं मिलता कि वह किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध अपना सदस्य बनाए।

मानवाधिकारों के अनुच्छेद-21 के तहत हर व्यक्ति को शासन में भागीदारी करने का अधिकार है तो हर किसी को अपनी पसंद की जीविका चाहने का अधिकार भी है। इस तरह सार्वभौम मानवाधिकारों में अनुच्छेद-30 तक इंसान की गरिमा और उसके अस्तित्व को प्रतिष्ठित किया गया है।

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