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पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मंहगाई बढ़ने के आसार, 10 दिनों में इतने तक बढ़े दाम

डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की तरह चुपके चुपके ही परिवहन कारोबारी भी अधिक दामों पर ट्रांसपोर्टिंग कर रहे हैं। इसका खामियाजा अनाज, सब्जी, तेल और सामान्य उत्पादों की कीमतों पर हो रहा है।

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मंहगाई बढ़ने के आसार, 10 दिनों में इतने तक बढ़े दाम

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों की तरह चुपके चुपके ही परिवहन कारोबारी भी अधिक दामों पर ट्रांसपोर्टिंग कर रहे हैं। इसका खामियाजा अनाज, सब्जी, तेल और सामान्य उत्पादों की कीमतों पर हो रहा है। इन उत्पादों की थोक कीमत कम होने के बावजूद चिल्हर बाजारों में परिवहन की कीमत की वजह से ग्राहकों को सामान अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।

दो रुपए तक बढ़े दाम

महीनेभर के भीतर ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपए तक वृद्धि हो गई। इसकी वजह से बाहरी राज्यों से आने वाले सामान पर हर दिन असर पड़ रहा है। दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में सब्जियों की आवक बढ़ने से कीमतों में गिरावट होती थी। इस बार जनवरी की शुरुआत में भी सब्जियों की कीमत में कमी नहीं आई।

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घर के बजट पर पड़ने लगा असर

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चुपके चुपके धधक रही आग में आम आदमी लगातार झुलसता जा रहा है। बीते 10 दिनों में पेट्रोल की कीमत में एक रुपए और डीजल की कीमत में लगभग डेड़ रुपए तक वृद्धि हुई है। मंगलवार को पेट्रोल की कीमत 73.38 रुपए और डीजल की कीमत 69.13 रुपए रही।

महज एक दिन में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर 8 पैसों तक वृद्धि हो गई। हर दिन बदलते दाम की वजह से पेट्रोल डीजल की कीमतों पर चारों ओर सन्नाटा है, लेकिन इसका असर अब घर के बजट पर भी पड़ने लगा है।

हर दिन 10 पैसों तक वृद्धि

पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पहले की स्थिति में दो-तीन महीने में एक बार 50 पैसों से लेकर 1 या 1.50 पैसों तक वृद्धि होती थी। वर्तमान में हर दिन पेट्रोल और डीजल की कीमत 5 से 10 पैसों तक बढ़ रही है। पिछले दो महीने के आंकड़ों को देखा जाए, तो एक बार भी कीमत में कमी नहीं आई। धीरे धीरे 3-4 रुपए तक कीमत बढ़ गई है। लंबे वक्त के बाद पेट्रोल की कीमत 73 रुपए के पार चली गई। डीजल भी 70 के करीब पहुंच गया है।

जीएसटी के दायरे में लाने की मांग

पेट्रोल पंप एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है, पेट्रोलियम उत्पादों की लगातार बढ़ती कीमतों से वे भी प्रभावित हैं। आए दिन कीमतों में अंतर को लेकर ग्राहकों से बहस और विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। इस संबंध में पहले ही एसाेसिएशन द्वारा वित्तमंत्री को चिट्ठी लिखकर पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की गई थी। इससे कीमतों पर अंकुश लगने की उम्मीद थी। इस संबंध में अब तक फैसला नहीं लिया जा सका।

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ऑटो और टैक्सी भी महंगे

पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों ने सार्वजनिक परिवहन को भी महंगा बना दिया है। आधिकारिक रूप से ऑटो की कीमत तय नहीं की जाती, लेकिन पिछले दो महीनों में ऑटो वालों ने 10 से 20 रुपए तक भाड़ा बढ़ा दिया है।

इसी तरह टैक्सी समेत अन्य गाड़ियों में भी यात्रियों से अधिक किराया वसूल किया जा रहा है। बस ऑपरेटरों ने पहले ही बसों का किराया बढ़ाने की मांग कर दी है। अगले कुछ दिनों में सार्वजनिक परिवहन भी मुश्किल हो सकता है।

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