Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

MHRD ने दिए संकेत, IIT, NIT के शोधार्थियों की छात्रवृत्ति में होगा इजाफा

आईआईटी और एनआईटी जैसे उच्च-शिक्षा के केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों के कुल करीब सवा लाख शोधार्थी छात्रों द्वारा छात्रवृति की राशि में इजाफा न किए जाने के विरोध में सरकार के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ने के ऐलान का मंगलवार को ही महकमे पर साफ असर होता हुआ दिखाई पड़ा।

MHRD ने दिए संकेत, IIT, NIT के शोधार्थियों की छात्रवृत्ति में होगा इजाफा

आईआईटी और एनआईटी जैसे उच्च-शिक्षा के केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों के कुल करीब सवा लाख शोधार्थी छात्रों द्वारा छात्रवृति की राशि में इजाफा न किए जाने के विरोध में सरकार के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ने के ऐलान का मंगलवार को ही महकमे पर साफ असर होता हुआ दिखाई पड़ा।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च-शिक्षा विभाग के सचिव आर. सुब्रमण्यम ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि इस मामले को लेकर विभाग को पूरी जानकारी है। हमने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसटी विभाग से तमाम जरुरी पहलुओं पर चर्चा कर ली है।
डीएसटी के द्वारा वित्त मंत्रालय को तमाम विषय से अवगत करा दिया गया है। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही इसका समाधान निकलेगा। हो सकता है कि नए साल की शुरुआत में केंद्र की ओर तैयार एक प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी और उसके बाद छात्रवृति की राशि में इजाफा होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रवृति का यह तमाम मामला सीधे तौर पर डीएसटी की निगरानी में ही संचालित होता है। वही इस पर तमाम सरकारी विभागों के बीच समन्वय और संवाद करते हैं।
ये है पूरा मामला
विरोध की इस कवायद में आईआईटी-एनआईटी के अलावा आयसर और आईआईएससी जैसे संस्थानों के शोध कर रहे छात्र भी शामिल हैं। सभी का ये तर्क है कि पिछली बार वर्ष 2014 में तत्कालीन केंद्रीय एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी के कार्यकाल में छात्रवृति की राशि बढ़ी थी।
लेकिन उसके बाद से लेकर अब तक चार साल बीत जाने के बाद भी इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। जबकि मौजूदा दौर में दी जा रही छात्रवृति की राशि बेहद कम है। कई छात्र इसकी मदद से अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। उस हिसाब से देखने पर तो यह राशि बेहद कम नजर आती है।
छात्रों में ज्यादा आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि कई बार मामले को एचआरडी मंत्रालय के समक्ष रखे जाने के बाद और प्रस्तुतियां देने के बाद विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। यहां बता दें कि 2010 में 16 से 18 हजार रुपए की तुलना में 2014 में इस राशि को 56 फीसदी बढ़ाकर 25 से 28 हजार रुपए कर दिया गया था।
Share it
Top