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Holi Ke Geet : होली के गीत

होली 2019 में 21 मार्च को मनाई जाएगी। उर्दू के तमाम शायरों ने नज्मों में होली के खूब रंग बिखेरे हैं। सूफी कलामों में होली का रंग अलहदा ही नजर आता है। इनमें वही भाव मिलते हैं, जो मीराबाई के पदों में हैं। अपने आराध्य संग होली खेलने की अप्रतिम मनोकामना लिए अनेक मुस्लिम कवियों ने अविस्मरणीय पंक्तियां रचीं। खेलूंगी होली ख्वाजा घर आए।

Holi Ke Geet : होली के गीत

होली 2019 में 21 मार्च को मनाई जाएगी। उर्दू के तमाम शायरों ने नज्मों में होली के खूब रंग बिखेरे हैं। सूफी कलामों में होली का रंग अलहदा ही नजर आता है। इनमें वही भाव मिलते हैं, जो मीराबाई के पदों में हैं। अपने आराध्य संग होली खेलने की अप्रतिम मनोकामना लिए अनेक मुस्लिम कवियों ने अविस्मरणीय पंक्तियां रचीं।

‘खेलूंगी होली ख्वाजा घर आए।’

अट्ठारहवीं शताब्दी के पंजाबी सूफी फकीर बुल्ले शाह ने लिखा है

होरी खेलूंगी कह बिस्मिल्लाह...

नम नबी की रतन चढ़ी

बूंद पड़ी अल्लाह अल्लाह।

एक अन्य सूफी कवि शाह नियाज की रचना में कुछ यूं पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे हसन और हुसैन के रंग खेलने का वर्णन है-

होली होय रही है अहमद जियो के द्वार

हजरत अली का रंग बनो है,

हसन हुसैन खिलाड़

मेरे हजरत ने मदीने में मनाई होली

उधर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर बरसों से फूलों की होली खेलने की परंपरा रही है।

शायर नजीर खय्यामी कहते हैं

ईमान को ईमान से मिलाओ

इरफान को इरफान से मिलाओ

इंसान को इंसान से मिलाओ

गीता को कुरान से मिलाओ

दैर-ओ-हरम में हो ना जंग

होली खेलो हमारे संग

होली के रंग में सबके रंगे होने का इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है। मतलब होली की इस परंपरा का संदेश निहायत साफ है। इंसान को इंसान से मिलाने का रिवाज। सामाजिक सद्भाव का अप्रतिम त्योहार है होली।

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