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Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

Holi Essay (होली पर निबंध) : 21 मार्च को होली का त्यौहार (Holi Festivel) मनाया जाएगा। अगर आपको स्कूल में होली पर निबंध (Holi Par Nibandh) लिखना है तो लेखिका नम्रता नदीम द्वारा होली का सबसे बेस्ट निबंध (Essay on Holi) हम आपके लिए लाये हैं और होली का निबंध हिंदी (Holi Essay In Hindi) में आपके लिए सबसे बेस्ट साबित होगा।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

Holi Essay (होली पर निबंध) : 21 मार्च को होली का त्यौहार (Holi Festivel) मनाया जाएगा। अगर आपको स्कूल में होली पर निबंध (Holi Par Nibandh) लिखना है तो लेखिका नम्रता नदीम द्वारा होली का सबसे बेस्ट निबंध (Essay on Holi) हम आपके लिए लाये हैं और होली का निबंध हिंदी (Holi Essay In Hindi) में आपके लिए सबसे बेस्ट साबित होगा।

रंगों का त्यौहार होली बसंत ऋतु के आगमन का सूचक है। होली के त्यौहार का मतलब है जब प्रकृति में चारों ओर फैली हरियाली में रंग बिरंगे फूल पूरी धरा को रंगीन बनाते हैं। प्रकृति की इस रंग बिरंगी बिखरी छटा से मेल खाता है रंगों का यह त्यौहार होली। लेकिन रंगों के त्यौहार होली का बाजारीकरण इस कदर हो गया है कि लोग प्राकृतिक रंगों से होली खेलना भूलकर नए नए किस्म के रासायनयुक्त रंगों से होली खेलते हैं जिसका उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। हमें यह नहीं भूला चाहिए कि होली इन कृत्रिम रंगों का प्रतीक नहीं है। जिस तरह दीवाली का त्यौहार भी बाजारीकरण के कारण हमारे पर्यावरण के लिए साल दर साल नए किस्म के खतरे पैदा कर रहा है और जिन खतरों से निजात पाने के लिए हमें दीवाली के त्यौहार पर कम से कम आतिशबाजी छोड़ने की सलाह दी जाती है उसी तरह रंगों के त्यौहार होली को भी प्राकृतिक रंगों से मनाकर हम इकोफ्रेंडली होली मना सकते हैं जो हमारे पर्यावरण के अनुकूल होगा।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

होली को शुद्धता से मनाने और इसे प्रकृति के साथ जोड़ने के लिए कई पर्यावरण प्रेमी और समाज सेवी संस्थाएं लोगों को इस बात के लिए जागरूक कर रही हैं कि वे होली को अपने परंपरागत रूप में मनाए यानी कृत्रिम, रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किए बगैर प्राकृतिक रंगों से होली खेलें। होली के मौके पर एक दूसरे को रंग, अबीर, गुलाल लगाने के लिए खतरनाक रासायनयुक्त रंगों का इस्तेमाल करना, होलिका देहन के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ियों के द्वारा न केवल जंगलों की कटाई होती है। इसके अलावा वातावरण भी प्रदूषित होता है। खतरनाक जहरीली गैसे वातावरण को प्रदूषित करती है। इसके अलावा होली खेलने के दौरान होने वाले पानी के अपव्यय का भी हमारे वातावरण पर विपरीत असर होता है।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

पहले जहां लोग होली मनाने के लिए रंग बनाने के लिए इन दिनों पेड़ों और पौधों से फूलों को लेकर उनसे रंग तैयार किया करते थे। पारिजात, टेसू जैसे और अन्य तमाम फूलों के रंगों को होली के रंगों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन आज होली का इतना ज्यादा बाजारीकरण हो गया है कि अब इस मौके पर कई दिन पहले ही बाजार कई तरह के कृत्रिम रंगों, पेंट, स्प्रे से पट जाते हैं। पहले जहां खूबसूरत प्राकृतिक रंगों से सुंदर रंग तैयार होते थे वे त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते थे और न ही इन्हें हासिल करने के लिए बाजार का रूख करना पड़ता था। समय बदलता गया और छोटे बड़े शहरों में पेड़ों की कटाई का अबाध सिलसिला चलता रहा। जिसकी वजह से लोग प्राकृतिक फूलों के रंगों का इस्तेमाल होली में करना धीरे धीरे भूल गए। इसकी जगह अब कृत्रिम रंगों ने ले ली।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

विभिन्न पर्यावरण संगठनों द्वारा पिछले कई सालों से इन कृत्रिम रंगों के दुष्प्रभावों के विषय में लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस अध्ययन मंे लोगों को होली के मौके पर इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों की भयावहता से अवगत कराया जा रहा है। सूखे और गीले रंगों में मौजूद खतरनाक रासायनों का शरीर पर बुरा असर होता है। काले रंग में लीडआॅक्साइड मिलाया जाता है। हरे रंग को बनाने में काॅपर सल्फेट का मिलान होता है जिससे आंखों मंे एलर्जी हो सकती है और सूजन और आंशिक अंधता जैसे बुरे परिणाम भी हो सकते हैं। सिल्वर रंग को बनाने में एल्युमिनियम ब्रोमाइड डाला जाता है। नीला रंग बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनों से सिर की त्वचा को नुकसान पहुंचता है। लाल रंग बनाने के लिए मर्करी सल्फाइट का इस्तेमाल होता जिससे त्वचा का कैंसर हो सकता है।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

सूखे रंगों जैसे- गुलाल को बनाने में एस्सबेसटोस या सिल्का मिलाया जाता है। जो स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकता है। इसमें मौजूद खतरनाक रासायन अस्थमा, त्वचा से संबंधित रोगों और आंखों पर बुरा प्रभाव डालते हैं। गीले होली के रंग में जैनेटियन वाॅयलेट का इस्तेमाल होता है। जिससे त्वचा बदरंग हो जाती है और सिर की त्वचा पर बुरा प्रभाव होता है। इसके अलावा होली पर पटरी पर बिकने वाले खुले रंग बेचे जाते हैं। जिनका हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। कभी कभी होली के मौके पर डिब्बों में बंद रंगों के विषय में डिब्बे पर ‘केवल उद्योगिक इस्तेमाल के लिए’ लिखा रहता है। इन्हें देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे रंग हमारे स्वास्थ्य के लिए कितने हानिकारक हो सकते हैं।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

इकोफ्रेंडली होली खेलें और लोगों को भी ऐसी होली खेलने के लिए प्रेरित करें। इकोफ्रेंडली होली यानी पानी का अपव्यय न करें यानी सूखे प्राकृतिक रंगों से होली खेलें। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पानी मानव जीवन के लिए कितना उपयोगी है और हम लगातार पानी की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में पानी का बेजा इस्तेमाल होली खेलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। बिना पानी के भी होली खेलने के मजे में कोई कमी नहीं आती। सूखी होली के द्वारा हम अपनी प्रकृति को तो सुरक्षित रखते ही हैं इसके अलावा इकोफ्रेंडली होली मनाकर सभी को अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखने की सीख दे सकते हैं।

Holi Essay In Hindi : होली पर निबंध हिंदी में

...तो चलें, इस बार की होली न सिर्फ हम इकोफ्रेंडली खेले बल्कि दूसरों के सामने ऐसी होली खेलकर एक उदाहरण तो पेश करें ही साथ ही लोगों को प्राकृतिक रंगों से, बिना पानी के होली खेलने का मजा लेने के लिए प्रोत्साहित करें। क्योंकि पर्यावरण का वास्ता हम सभी से है। हम सभी को अपनी पर्यावरण को साफ सुथरा रखने के लिए प्रयास करने होंगे। होली के त्यौहार को भी इस नये तरीके से मनाए।

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