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Happy Holi : पूरे देश में बिखरी रंगोत्सव की इंद्रधनुषी छटा, जानें कहां-कैसे मनाई जाती है होली

गलियों में वासंती गीतों के बोल और ढोलों की ध्वनियां हैं। लोग गलियों में नाच रहे हैं और सुंदर-मदमस्त महिलाएं, उन पर पिचकारियों से रंग-पानी बरसा रही हैं। हवा सूखे रंगों के गुबार से ढंक गई है। सुनहरे कपड़े और सोने के आभूषण पहनी हुई महिलाओं ने अशोक के फूलों की मालाएं सजाई हुई हैं।

Happy Holi : पूरे देश में बिखरी रंगोत्सव की इंद्रधनुषी छटा, जानें कहां-कैसे मनाई जाती है होली

गलियों में वासंती गीतों के बोल और ढोलों की ध्वनियां हैं। लोग गलियों में नाच रहे हैं और सुंदर-मदमस्त महिलाएं, उन पर पिचकारियों से रंग-पानी बरसा रही हैं। हवा सूखे रंगों के गुबार से ढंक गई है। सुनहरे कपड़े और सोने के आभूषण पहनी हुई महिलाओं ने अशोक के फूलों की मालाएं सजाई हुई हैं।

आंगन लाल हो गया है और युवतियों के गालों से गुलाल बिखर रहा है। दक्षिण से आ रही हवाएं आम के पेड़ों को खिला रही हैं। सारे माहौल को देखकर बकुल और अशोक के पेड़ महक रहे हैं। मकरंद का बागीचा, नशीली मधुमक्खियों और कोयल के रस भरे गीतों से गुनगुना रहा है। चंपा के पेड़ मुस्कुरा रहे हैं। यह 7वीं शताब्दी में लिखे नाटक ‘रत्नावली’ के आरंभ में किया गया वसंतोत्सव का वर्णन है।

वसंतोत्सव बन गया रंगपर्व

प्राचीन समय में वसंतोत्सव प्रेम के देवता काम का त्यौहार था, जो बाद में रंगपर्व होली के रूप में मनाया जाने लगा, विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में। हालांकि अन्य जगहों पर भी वसंतोत्सव होली के रूप में मनाया जाने लगा, लेकिन इसके मनाने के कारण और तरीके में काफी परिवर्तन आता गया।

यह अलग बात है कि इस त्यौहार का वास्तविक संबंध मौसम विशेष से है और इसलिए यह फाल्गुन में ही मनाया जाता है। जहां इस त्यौहार के साथ प्रहलाद और होलिका की कहानी को जोड़ा गया, वहीं गुरु गोबिंद सिंह ने इसे होला मोहल्ला के रूप में विकसित किया।

देश के अलग-अलग क्षेत्रों में यह पर्व अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। अगर आप इस अवसर पर सफर पर निकलें तो इस होली पर्यटन का अपना ही मजा आएगा।

लट्ठमार-लड्डू होली

अगर आपने मथुरा के निकट बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली नहीं देखी तो कुछ नहीं देखा। इसमें पुरुष, महिलाओं को छेड़ते हैं और महिलाएं पुरुषों को लट्ठ से पीटती हैं। लट्ठमार होली मुख्य होली से एक सप्ताह पहले आयोजित की जाती है।

बेहतर होगा कि इसका मजा लेने के लिए आप लट्ठमार होली से कुछ दिन पहले बरसाना चले जाएं ताकि वहां होने वाली लड्डू होली जैसे उत्सव का अनुभव भी कर सकें। इसमें लड्डू एक-दूसरे पर फेंके जाते हैं और राधा-कृष्ण से जुड़े गीत गाए जाते हैं। इसके बाद का उत्सव नंदगांव में अगले दिन से होता है।

मथुरा में होलियाना उत्सव

मथुरा और वृंदावन में होली से 40 दिन पहले यानी वसंत पंचमी को होली मनानी शुरू हो जाती है। मथुरा में श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर विशेष आयोजन होता है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में सप्ताह भर का जश्न मनाया जाता है, जो फूलों वाली होली से शुरू होता है और रंगों वाली होली के साथ समाप्त होता है। भंग का मजा लेना है तो विश्राम घाट जा सकते हैं और रंग फेंकने का आनंद लेना है तो मथुरा का द्वारिकाधीश मंदिर सबसे अच्छी जगह है।

बंगाल की संगीतमय होली

शांति निकेतन (पश्चिम बंगाल) में होली को सांस्कृतिक वसंत उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने शुरू की थी। छात्र वसंती रंगों की वेश-भूषा में गुरुदेव के गीतों पर नाचते हुए पर्यटकों के लिए आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। वसंत उत्सव बंगाली इतिहास और संस्कृति का अटूट हिस्सा बन गया है और बहुत से विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है।

तीन दिन का वसंत उत्सव, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में भी आयोजित किया जाता है। इसमें आप स्थानीय लोगों के साथ नाच-गा सकते हैं और होली खेल सकते हैं। यहां अनूठी लोककलाओं जैसे चाऊ नृत्य, दरबारी झूमर, बंगाल के घुमंतू बाउल संगीतकारों के संग, का आनंद लिया जा सकता है । इस दौरान यहां रहने वाले पर्यटकों के रहने की व्यवस्था टेंट में की जाती है।

पंजाबी-राजस्थानी होली

पंजाब के आनंदपुर साहिब में होला मोहल्ला का आयोजन वर्ष 1701 से हर साल किया जा रहा है। इसमें एक-दूसरे पर रंग नहीं फेंके जाते, बल्कि इस चार दिन के उत्सव में शारीरिक करतबों का प्रदर्शन किया जाता है और पगड़ी बांधने का आयोजन होता है।

राजस्थान के उदयपुर, में शाही होली का मजा ले सकते हैं। मेवाड़ का शाही परिवार शानदार जुलूस में अपने महल से सिटी पैलेस के मानक चौक तक की यात्रा करता है, जिसमें सजे-धजे घोड़े, शानदार बाजे आदि सब होते हैं। चौक में पहुंचकर बुरी आत्माओं को भगाने के लिए होलिका दहन की जाती है और साथ ही होलिका का पुतला भी जलाया जाता है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में हर साल होली की पूर्व संध्या पर हाथी उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें हाथी परेड करते हैं। साथी ही हाथियों के सजावट की प्रतियोगिता होती है और लोक नृत्य भी। इस अवसर पर स्थानीय लोग और विदेशी पर्यटक, हाथियों के संग रस्साकशी का खेल भी खेलते हैं। जयपुर में आयोजित होने वाले विशेष होली वाकिंग टूर ‘वैदिक वाक’ में भी आप शामिल हो सकते हैं।

मस्ती भरी मुंबइया होली

धारावी, मुंबई का सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है। लेकिन होली के अवसर पर यहां का रंग कुछ और ही नजर आता है। यहां होली की जबर्दस्त पार्टी का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोगों के साथ, मस्ती के वातावरण में रंगों और संगीत के साथ आप भी होली का मजा ले सकते हैं।

पार्टी में बाहरी पर्यटकों को हिस्सा लेने के लिए प्रति व्यक्ति कुछ प्रवेश शुल्क लिया जाता है, जिसका 80 प्रतिशत हिस्सा धारावी के विकास और लोगों की मदद के लिए खर्च किया जाता है।

दिल्ली की होली

दिल्ली में होली का हुड़दंगी रंग भी अपनी तरह का अनोखा मजा देता है। इस मौके पर कुछ जगहो पर संगीतमय होली उत्सव का आयोजन होता है। यह रंग, संगीत और उमंग का संगम होता है। इसमें कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकार परफॉ‚र्म करते हैं। यहां हर्बल रंग उपलब्ध कराए जाते हैं, लस्सी और खाने-पीने का इंतजाम भी होता है। इन कार्यक्रमों में टिकट और पास से एंट्री होती है।

कहने का सार यही है कि होली अपने पूरे देश में अलग-अलग रंग और अलग-अलग ढंग से मनाई जाती है। आपको इसका जो रंग रुचिकर लगे उसका आनंद लेने के लिए पहुंच जाइए उस इलाके में।

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