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HIV पॉजिटिव महिला ने झील में कूदकर दी जान, गांववालों ने पानी पीना किया बंद

कर्नाटक के मोराब से एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां एक झील में एक एचआईवी पॉजिटिव महिला ने सुसाइड किया। इसके बाद गांव वालों ने यहां के पानी का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है।

HIV पॉजिटिव महिला ने झील में कूदकर दी जान, गांववालों ने पानी पीना किया बंद

कर्नाटक के मोराब से एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां एक झील में एक एचआईवी पॉजिटिव महिला ने सुसाइड किया। इसके बाद गांव वालों ने यहां के पानी का इस्तेमाल करना छोड़ दिया है।

बताया जा रहा है कि मोराब झील नवलगुंद तालुका की सबसे बड़ी झील है। गांव में यही एकमात्र झील है जिसका पानी गावंवाले पीने के लिए और पशुओं के लिए इस्तेमाल करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद गांववाले अब दो-तीन किलोमीटर दूर चलकर पानी ला रहे हैं। घटना करीब एक सप्ताह पहले की है। 29 नवंबर को महिला का शव झील से मिला था।

इसके बाद पूरे गांव में खबर फैल गई कि पानी दूषित हो गया है। लोगों ने पानी पीने से इनकार कर दिया और प्रशासन पर झील से पानी निकालने का दबाव बनाया। प्रशासन अब इस छत्तीस एकड़ की झील का पानी निकाल रहा है। पानी को निकालने के बाद मलाप्रभा नहर से इसे दोबारा भरा जाएगा।

बता दें मोराब झील नवलगुंद तालुका की सबसे बड़ी झील है और लोगों और पशुओं के पीने के पानी का एकमात्र स्त्रोत है। अब लोग 2-3 किमी चलकर मलाप्रभा नहर से पानी ला रहे हैं।

इस घटना पर धारवाड़ जिले के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेंद्र दोड्डामनी ने कहा, 'यह दुर्भाग्य है। हम लोगों को कह रहे हैं कि एचआईवी पानी के कारण नहीं फैलता है। लेकिन लोग नहीं मान रहे हैं।'

वहीं आशा फाउंडेशन के संस्थापक डॉक्टर ग्लोरी एलेक्जेंडर कहते हैं कि 'यह मामला डर से अधिक जुड़ा हुआ है। यह सब जागरुकता की कमी के कारण हो रहा है। जब किसी एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति की मौत होती है तो वायरस भी खत्म हो जाता है। अगर वायरस शरीर से बाहर आ भी जाए तो वह पानी और हवा में कुछ ही सेकेंड में खत्म हो जाता है। पानी से संक्रमण फैलने का कोई रिस्क नहीं है।'

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