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शीतकालीन सत्र: राज्यसभा ने रचा इतिहास, उपराष्ट्रपति ने की तारीफ

राज्यसभा ने आज उस समय रिकार्ड बनाया जब शून्यकाल में लोक महत्व के तहत और विशेष उल्लेख के जरिए उठाए जाने वाले स्वीकृत सभी विषय पूरे हुए। सभापति एम वेंकैया नायडू ने शून्यकाल पूरा होने पर इसका जिक्र किया और कहा कि राज्यसभा ने आज एक छोटा सा इतिहास रचा है।

शीतकालीन सत्र: राज्यसभा ने रचा इतिहास, उपराष्ट्रपति ने की तारीफ

राज्यसभा ने आज उस समय रिकार्ड बनाया जब शून्यकाल में लोक महत्व के तहत और विशेष उल्लेख के जरिए उठाए जाने वाले स्वीकृत सभी विषय पूरे हुए। सभापति एम वेंकैया नायडू ने शून्यकाल पूरा होने पर इसका जिक्र किया और कहा कि राज्यसभा ने आज एक छोटा सा इतिहास रचा है।

उन्होंने जिक्र किया कि पहली बार शून्यकाल और विशेष उल्लेख के जरिए उठाए जाने वाले स्वीकृत सभी विषय पूरे हुए। सदस्यों ने मेजें थपथपा कर इसका स्वागत किया। नायडू ने कहा कि यह सदस्यों के सहयोग के कारण संभव हो सका है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भविष्य में भी सदन में इस तरह से कामकाज होता रहेगा।

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उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे शून्यकाल और विशेष उल्लेख के जरिए उठाए जाने मुद्दों पर गौर करें तथा जल्दी से जल्दी संबंधित सदस्यों को इसका जवाब दें। उन्होंने कहा कि इससे सदन की उत्पादकता में वृद्धि होगी। बाद में प्रश्नकाल में भी बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ कि मौखिक प्रश्नों के लिए सूचीबद्ध सभी प्रश्नों का नंबर आ गया।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जिन लोगों के नाम से मौखिक प्रश्न सूचीबद्ध था, उनमें से कई लोग आज सदन में मौजूद नहीं थे। सभापति नायडू ने इस पर सदस्यों को सुझाव दिया कि मौखिक प्रश्न काफी तैयारी के बाद बनाये जाते हैं। इसलिए जिन सदस्यों के सवाल हों, उन्हें सदन में प्रश्नकाल के दौरान उपस्थित रहना चाहिए।

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