Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Exclusive Interview: UGC की जगह HECI लाने पर आर सुब्रमण्यम ने दी आलोचकों को नसीहत

एचआरडी मंत्रालय की ओर से यूजीसी की जगह पर राष्ट्रीय उच्च-शिक्षा आयोग के गठन को लेकर लाए गए बिल के प्रारुप के बाद देश में घमासान मचा है।

Exclusive Interview:  UGC की जगह HECI लाने पर आर सुब्रमण्यम ने दी आलोचकों को नसीहत
X

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) की ओर से बीते सप्ताह 27 जून को यूजीसी की जगह पर राष्ट्रीय उच्च-शिक्षा आयोग (एचईसीआई) के गठन को लेकर लाए गए बिल के प्रारुप के बाद देश में मचे राजनीतिक और गैर-राजनीतिक बवाल के बीच मंगलवार को मंत्रालय में उच्च-शिक्षा विभाग में सचिव आर. सुब्रमण्यम सामने आए और उन्होंने इस मामले से जुड़े हर एक पहलू पर हरिभूमि से खास बातचीत में न केवल खुलकर विभाग का पक्ष रखा। बल्कि आलोचकों को भी तर्कशीलता के गुण को अपनाने की नसीहत दी।

पेश है बातचीत के अंश-

प्रश्न- आयोग का गठन करने के पीछे क्या उद्देश्य है। क्यों मंत्रालय ने यूजीसी जैसे दशकों पुराने संस्थान को यकायक खत्म करने का निर्णय लिया?

उत्तर- हमने यूजीसी को खत्म करने का निर्णय नहीं लिया है। वर्तमान जरुरतों, वैश्विक परिदृश्य में हो रहे बदलावों का विश्लेषण किया गया। भारत ग्लोबल नॉलेज इको सिस्टम का हिस्सा है।

ऐसे में केवल यह कहना कि अपने देश के अंदर बैठकर ही हम यह मानने लगे कि हम अच्छे हैं। हमारे पास 3.7 करोड़ छात्र हैं। इससे काम नहीं चलेगा। आज के वक्त में आवश्यकता इस बात की है कि हम तेजी से बढ़ रहे देशों जैसे चीन व अन्यों से मुकाबला कर सकें।

अगर यह नहीं होगा तो हम केवल वहीं रह जाएंगे, जहां हैं। यूजीसी का ध्यान अकादमिक मसलों को छोड़कर पूरी तरह से वित्तीय विषयों की ओर केंद्रित था। इस बदलाव के पीछे हमारा उद्देश्य अकादमिक स्तर पर इस संस्थान का ज्यादा ध्यान केंद्रित कराना है। इससे हमारे बच्चों और देश को फायदा होगा। इस प्रक्रिया के जरिए जब बच्चे पढ़कर आएंगे तो वह कुछ अच्छा करेंगे और उन्हें अच्छी नौकरी भी मिलेगी।

प्रश्न- एचईसीआई की घोषणा के बाद यूजीसी के मौजूदा स्टॉफ में नौकरी चले जाने का डर पैदा हो गया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

उत्तर- यूजीसी के मौजूदा स्टाफ को लेकर यह हमारा स्पष्ट संदेश है कि किसी को हटाया नहीं जाएगा। हमें सभी की सेवाएं चाहिए। लेकिन जैसे अभी आप फाइल चला रहे हैं, कोई मैमो दे रहे हैं, चिट्टी लिख रहे हैं। वैसा नहीं चाहिए।

हमें अकादमिक बदलाव चाहिए, संस्थानों को गाइड करने वाला, मेंटर करने वाला काम चाहिए। इस तरह का कुछ बदलाव हम कर सकते हैं। लेकिन किसी को नौकरी से निकालने की भावना अभी तक नहीं है।

प्रश्न- आयोग का कांग्रेस, वामदलों ने विरोध किया है। कुछ दिन बाद संसद का सत्र शुरु हो रहा है। तब तक क्या आम राय बन पाएगी?

उत्तर- मैं इस मामले पर हो रहे राजनीतिक विरोध को लेकर कहना चाहता हूं कि कोई भी बात राजनीतिक प्रॉपगेंडा के तहत नहीं की जानी चाहिए।

पहले प्रारुप को अच्छी तरह से पढ़ लें और उसके बाद जो भी तर्क या विचार हो मंत्रालय से साझा करें। हमारे दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। कोई भी नेता या अन्य व्यक्ति ड्राफ्ट पर जो भी बात रखना चाहता है। यहां आ सकता है। मुझसे या अन्य अधिकारियों से मिल सकता है।

एचईसीआई के पीछे एचआरडी का एक पवित्र उद्देश्य है कि देश के बच्चों का भविष्य खुशहाल हो। जो भी पढ़कर निकले, उसे नौकरी मिले, दुनिया में उसका सम्मान हो। सभी हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। चाहे वह राजनीतिक दल हो या शिक्षक संघ हो। यह राजनीतिक नहीं देश का एजेंड़ा है।

मुझे इस बात को लेकर पूरी तरह से विश्वास है कि हम सभी के विचार, डर, आशंकाओं का समाधान करने में सफल रहेंगे और एक आमराय बनाने में कामयाब होंगे।

प्रश्न- हायर एजुकेशन रेगुलेट्री अथोरिटी बनाने के निर्णय को मंत्रालय ने क्यों रद्द कर दिया?

उत्तर- जब हमने इस अथोरिटी को बनाने का निर्णय लिया। तब यह देखा कि अलग-अलग नियामकों की जगह पर एक यूजीसी है। इसी के तहत विश्वविद्यालय और कॉलेजों को मान्यता दी जाती है।

इन विवि, कॉलेजों के जरिए कई तकनीकी शिक्षण संस्थानों को मान्यता दी गई है। रेगुलेट्री बॉडी यूजीसी ही था और रहेगा। कई सारे नियामकों को एकजुट करना बहुत मुश्किल होता है। क्योंकि उसका कॉडर, पै-स्केल अलग-अलग होता है।

इन दोनों को मिलाकर कहां इसे स्थापित करें। ऐसे हालात में कई बार लोग कोर्ट चले जाते हैं। इसमें मंत्रालय और वह अथोरिटी चार-पांच साल तक कोर्ट का चक्कर काटती रहती है।

इसे देखकर हमें लगा कि जिस मकसद से हम इसे ला रहे थे। वह असफल हो जाएगा। इसलिए हमने यह निर्णय नहीं लिया। अब जो मानक हम एचईसीआई में बनाएंगे। उन्हें ही अन्य जगहों पर लागू किया जाएगा।

प्रश्न- एआईसीटीई, एनसीटीई के भविष्य को लेकर एचआरडी ने क्या निर्णय लिया है?

उत्तर- एचईसीआई में बनाए गए मानकों को ही अन्य संस्थानों में लागू किया जाएगा। हमारा मकसद एआईसीटीई और एनसीटीई में दखल देना नहीं है।

इसके लिए एचआरडी की ओर से नए दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं। इसके अलावा इस बात की भी संभावना है कि एआईसीटीई एक्ट में बदलाव लाने के बारे में भी विचार किया जा सकता है।

प्रश्न- डूटा, जेएनयू टीचर एसोसिएसन की ओर से किए जा रहे विरोध को लेकर आपका रुख क्या है?

उत्तर- इन्हें कहीं से राजनीतिक मेनडेट मिलता है कि इसका विरोध करो, करने लगते हैं। मुझे इस बात पर पूरा शक है कि इन्होंने प्रारुप ठीक ढंग से पढ़ा नहीं है।

मैंने व्यक्तिगत रुप से कई लोगों के बयान पढ़े हैं। उसे देखकर लगता है कि वह केवल आइडोलॉजिकल बाध्यता की वजह से विरोध कर रहे हैं। जो कुछ भी सामने आए बस विरोध करो की तर्ज पर। यह नहीं चलेगा। अपने दिमाग को खुला रखें। जब आप खुले दिमाग से सोचेंगे तो समाधान निकलकर आएंगे।

लेकिन जब आप अपना दिमाग बंद कर लेंगे और केवल इसी सोच के साथ आगे बढ़ेंगे कि हमें केवल विरोध करना है। तब तो आप खत्म हो जाएंगे और कोई समाधान निकलकर सामने नहीं आएगा। मैं शिक्षकों को कहना चाहूंगा कि इस प्रारुप को अच्छी तरह से पढ़ें और जो भी मत हो साझा करें।

प्रश्न- रेगुलेशन को लेकर क्राईटीरिया कैसा होगा?

उत्तर- सबसे पहले हम मानक बनाएंगे और फिर सभी संस्थानों को बताएंगे। जिसे मानकों का पालन करने में दिक्कत है। उसकी मदद करेंगे। प्रशिक्षण पर जितना भी खर्च होगा, हम देंगे।

इसके अलावा हम निगरानी भी करेंगे। निगरानी इंस्पेक्शन टीम भेजकर नहीं होगी। निगरानी पेरामीटर पर आधारित होगी। इन्हें हम तय करेंगे। संस्थानों को केवल इतना करना होगा कि अपनी वेबसाइट पर पेरामीटर के आधार पर प्रदर्शन का पूर्ण ब्यौरा देना पड़ेगा। गलत जानकारी नहीं होनी चाहिए।

अगर हुई तो उसकी पड़ताल हम कराएंगे। इसके लिए मंत्रालय सैंपल लेकर जांच करेगा। गलत जानकारी देने पर पेनल्टी लगेगी। इससे इंस्पेक्शन राज का पूरा तरह से खात्मा होगा।

प्रश्न- आयोग से मंत्रालय को ज्यादा शाक्तियां मिल जाएंगी और उसका रवैया पक्षपातपूर्ण हो जाएगा?

उत्तर- मंत्रालय ने इस मामले को लेकर बहुत ज्यादा शक्तियां अपने पास नहीं रखी हैं। इसमें केवल तीन सरकारी विभागों के सचिव हैं।

उच्च-शिक्षा विभाग, विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय और स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय में सचिव शामिल है। इससे कमीशन में इन महत्वपूर्ण विभागों का प्रतिनिधित्व एक अहम सदस्य के तौर पर होगा। हमारे पास कोई शक्ति नहीं है। स्वत: विकास लक्ष्य है। हम केवल निर्देश देंगे।

प्रश्न- निजी, सरकारी संस्थानों के बीच संतुलन कैसे बनेगा?

उत्तर- दोनों की अपनी-अपनी समस्याएं हैं। सरकारी इंस्ट्टीट्यूटस में इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम होना चाहिए, निजी में परफॉरमेंस बेहतर होनी चाहिए।

लेकिन एचईसीआई की तरफ से हमारा यही निर्देश रहेगा कि यह अकादमिक आउटकम आना चाहिए। मसलन आपके यह छात्र हैं तो उन्हें यह चीजें तो पता होनी ही चाहिए। कोई कहीं से भी पढ़कर निकले। अंत में उसे आना तो इसी जॉब मार्केट में है। इसलिए मानक सभी के लिए एक समान रहेंगे।

प्रश्न- एचईसीआई को लेकर सुझाव मंगाने की समयसीमा बढ़ेगी?

उत्तर- अभी हमने सात जुलाई तक का समय तय किया है। अगर आवश्यकता होगी या कोई हमसे अतिरिक्त समय की मांग करेगा। तो इसमें इजाफा किया जा सकता है।

इस समय तक ड्राफ्ट को लेकर कुल 1 हजार लोगों के सुझाव मंत्रालय को मिलें हैं। इसमें शिक्षाविद, सेवानिवृत निदेशक और वाइस चांसलर, शिक्षक, अभिभावक शामिल हैं।

यह सुझाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के हैं। नकारात्मक सुझावों में आलोचना के साथ अच्छा करने के लिए राय भी दी गई है।

प्रश्न- क्या संस्थानों को पैसा कमाने के लिए छोटे-छोटे कोर्सेज चलाने की अनुमति दी जाएगी?

उत्तर- आयोग का काम केवल अकादमिक विषय को देखना है। हमने प्रारुप में कहीं नहीं लिखा है कि मनमानी फीस वसूली जाएगी। सबसे पहला जोर अफोडेबिलिटी पर दिया गया है। हम नहीं चाहते कि देश में ऐसा कोई बच्चा रहे जो पैसे के अभाव में पढ़ाई न कर सके।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story