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Happy New Year 2019 : व्यंग्य - नशे में नए साल का स्वागत अनिवार्य

नया साल, हर साल मदहोशी के साथ कदम रखता है। ठंडी की खुमारी के साथ-साथ शराब की खुमारी भी उसके सर चढ़कर बोलती है। 31 दिसम्बर को पुराने साल को खूब पिलाया जाता है। उसे नशे में चूर कर दिया जाता है। ये कर्मकाण्ड उसके जाने के गम में होता है।

Happy New Year 2019 : व्यंग्य - नशे में नए साल का स्वागत अनिवार्य

नया साल, हर साल मदहोशी के साथ कदम रखता है। ठंडी की खुमारी के साथ-साथ शराब की खुमारी भी उसके सर चढ़कर बोलती है। 31 दिसम्बर को पुराने साल को खूब पिलाया जाता है। उसे नशे में चूर कर दिया जाता है। ये कर्मकाण्ड उसके जाने के गम में होता है। क्योकिं वो जो अब गया है फिर कभी लौटकर वापस नहीं आएगा। उसका जाना घरवाली के मायके जाने जैसा बिल्कुल नहीं है कि वो शर्तिया लौट आएगी। बल्कि उसका जाना बच्चे के दूध वाले दांतों के जाने जैसा है, जो अब लौटकर नहीं आने वाले।

31 दिसम्बर को चारों ओर सेलिब्रेशन दिखाई देता है, लेकिन मुर्गों और मुर्गियों में, बकरा और बकरियों में बेहद दशहत का माहौल होता है। उनके लिए ये दिन यमराज का फोकस वाला दिन होता है। यमराज की टॉर्च की फोकस लाइट उस दिन इन्हीं बेजुबानों पर तनी होती हैं। इस दिन तंदूर की भट्टी में रौनक दिखाई देती है। बार में बहार छाई रहती है।

पीढ़ियों में जोश का टशन उफान पर होता है। जहां एक तरह भूतपूर्व जवान गुलाबी नशे में दिखाई देते हैं तो वहीं दूसरी ओर जवानी के जमूरे फुल्ल टल्ली वाली सिचवेशन में गुलाटियां मारते हुए पाये जाते हैं। वैसे खग्गाड़ टाइप के शराबियों ने इस दिन पीने का बड़ा ही माहात्म्य बताया है। 31 की आधी रात को और पहली जनवरी की ठंडी सुबह में चढ़ाने वाले को साल भर दारू की दरिद्रता नहीं रहती।

इस दिन चढ़ाने वाले की साल भर उतरती नहीं है। अंग्रेजी कलेंडर का नया साल भविष्य में अंतराष्ट्रीय टल्ली दिवस के रूप में भी जाना जा सकता है। क्योंकि इस दिन टल्ली होने का रिवाज सा बन गया है। जो भी बंदा या बंदी इस दिन टल्ली नहीं हुवा, तो समझो उसने नए साल का जश्न मनाया ही नहीं। बिना झूमे, बिना पिये क्या ख़ाक न्यू इयर सेलिब्रेशन किया।

पुराने साल की विदाई और नए साल की बधाई शराब के जाम के साथ ही फबती है। बिना जाम के काम नहीं बनता। नया साल बिल्कुल लड़खड़ाता हुवा दस्तक देता है। नशे में धुत। ठिठुरती ठंड में बेचारा पिये ना तो करे क्या। नये साल का जो हल्का-हल्का सुरूर होता है, वो पीने पर जरूर होता है। बिना पिये सुरूर के सुर भी नहीं निकलते।

सुर को मधुर संगीत बनने के लिए हलक के नीचे उढ़ेलनी अनिवार्य हैं। नया साल अनेक संभावनाओं को जन्म देता है। नए साल के जश्न से भी बहुत कुछ निकल कर बाहर आता है। सिगरेट के धुएं के साथ नए साल का धुंधलका युवाओं के अंदर जोश पैदा कर देता है। अब नया साल का उत्सव नशे का महोत्सव बनता जा रहा है। नशा न हो तो सेलिब्रेशन जैसा कुछ भी नहीं होता। नए साल के स्वागत के लिए नशे में रहना अनिवार्य है।

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