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Happy New Year 2019 : जानें लोकसभा चुनाव को लेकर कैसा रहेगा नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के लिए नया साल

साल 2019 की शुरुआत में अब कुछ ही दिन बचे हैं। कई लोगों के मन में नए साल को लेकर कई सवाल होंगे। 2019 आम चुनाव के लिए तकरीबन 4 से 5 महीने ही बचे हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित तमाम पार्टियों लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी अपनी तैयारियों में जुट गई हैं।

Happy New Year 2019 : जानें लोकसभा चुनाव को लेकर कैसा रहेगा नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के लिए नया साल
साल 2019 (Happy New Year 2019)की शुरुआत में अब कुछ ही दिन बचे हैं। कई लोगों के मन में नए साल को लेकर कई सवाल होंगे। 2019 आम चुनाव (Lok Sabha Election 2019) के लिए तकरीबन 4 से 5 महीने ही बचे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) सहित तमाम पार्टियों लोकसभा चुनाव को लेकर अपनी अपनी तैयारियों में जुट गई हैं। गठबंधन से लेकर पार्टी में बदलाव और चुनाव प्रचार से लेकर प्रचार तक कैसे रहेगा नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के लिए नया साल। साल 2019 राजनीति के लिए सबसे अहम होने वाला है क्योंकि इस साल देश में आम चुनाव होने वाले हैं। जिसमें केंद्र की सत्ता के बदलाव का साल होगा। ऐसे में कौन अपनी सरकार बनाने में कामयाब होगा ये तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।
यहां हम बात देश के पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए लोकसभा चुनाव कैसे रहेगा। इसको लेकर कुछ कयासों के बारे में बता रहे हैं। हर बार जब साल बदलता है तो कुछ चीजों में भी बदलाव होता है। क्या इस साल पीएम मोदी फिर से देश के पीएम बनेंगे या फिर राहुली के बदलाव से कांग्रेस अपनी सत्ता में 5 साल बाद वापसी करेंगे।

मोदी वर्सिज राहुल

इस साल लोकसभा चुनाव में कड़ा मुकाबला दो पार्टियों के बीच नहीं दो व्यक्तियों के बीच होने वाला है। यह मुकाबला देश के पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच होने वाला है। नरेंद्र मोदी देश के 14वें प्रधानमंत्री हैं। जिन्होंने पहली बार भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमत से 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दिलाई थी। गुजरात की राजनीति में वर्षों तक अपना परचम लहराने के बाद भाजपा के सबसे ताकतवर राजनेता नरेंद्र मोदी अपने इन साढ़े 4 साल में कई कड़े फैसले लिए है। जिसने राजनीति की परिभाषा ही बदल कर रख दी।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी लोकसभा चुनाव 2014 में हार को बाद से ही केंद्र की मौत सरकार पर हमेशा आक्रमक दिख रहे हैं और इन साढ़े साल सालों में राहुल ने अपनी छवि से लेकर भाषणों में काफी बदलाव किया और उन्होंने वो हर चीज चुनावी रैली के दौरान की जो शायद उन्होंने पहली बार की हो और मीडिया में दिखाया गया है। तीन राज्यों में चुनाव जीतने के बाद अब राहुल गांधी पार्टी के साथ अब 2019 के लोकसभा चुनाव में अब पीएम मोदी को हराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम

हाल ही में पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना के चुनाव परिणामों ने 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को ही बदल कर रख दिया। इस चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा तो कांग्रेस थोड़ी सी उभर के सामने आई। इन चुनावों में कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने में कामयाब रही। लेकिन यहां भी भाजपा को जो झटका लगा वो वोट प्रतिशत की कमी को दिखाता है। पिछले साल 11 दिसंबर को ही राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्‍यक्ष की कमान संभाली थी। राहुल गांधी ने एक साल पूरा किया तो उन्हें नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तोहफा दिया। इस चुनाव में भाजपा के अंदर बेचैन हुई तो पीएम मोदी ने तुरंत हार के कारणों को लेकर समीक्षा बैठक की। इसमें चुनाव परिणामों की समीक्षा के साथ ही 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भी पार्टी अपनी तय रणनीति पर पुनर्विचार किया।

पीएम मोदी के लिए चुनौती

बीते साढ़े चार साल में नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव भाषण में जो बातें पूरी करने का वादा किया अभी भी उनमें से कई वादे अधूरे हैं जिसको लेकर हर बार विपक्ष उनपर निशाना साधता रहता है। इन दिनों मोदी के सामने चुनौती राम मंदिर निर्माण को लेकर है। जिसको लेकर वो पिछले कई दिनों से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वहीं काला धन वापस लाने और हर नागरिक के बैंक अकाउंट में 15 लाख लाने का वादा अब भी अधूरा है।

ये हैं वो मुद्दे जो पीएम के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं....

नौकरी/रोजगार
अर्थव्यवस्था
महंगाई का मोर्चा
भ्रष्टाचार
कानून व्यवस्था
अयोध्या जैसे मुद्दे

भाजपा की 2019 को लेकर रणनीति

भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर अपनी तैयारी तेजी से कर रही है। हाल ही में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 18 राज्यों के प्रभारियों और सह प्रभारियों की लिस्ट जारी कर दी। जो 2019 के चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। इस लिस्ट में गोवर्धन झडपाडिया, दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा को सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश की अहम जिम्मेदारी दी।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के मुद्दे

तीन राज्यों में चुनाव जीतने के बाद राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस ने आने वाले चुनावों को लेकर तेजी से काम कर रही हैं। इसको लेकर राहुल कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं जिसका खामियाजा 2019 के चुनाव में भुगतना पड़े। एक साल पहले ही अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी। जब से राजनीति में राहुल गांधी आए हैं, ऐसा पहली बार रहा होगा जब उन्होंने किसी बड़े नेता को सीधे बहस की चुनौती दी है। पिछले एक साल में उन्होंने राफेल और किसानों जैसे कई मुद्दों पर पीएम मोदी को सीधे मुकाबले की चुनौती दी है। राहुल हमेशा सरकार को राफेल, किसान, सीबीआई, नोटबंदी, पीएनबी घोटाला आदि मुद्दों पर घेरते रहे हैं। राहुल ने पिछले एक साल से कई बार पीएम मोदी को बहस के लिए कई बार सीधी चुनौती भी दी।

पार्टी में युवाओं और सीधे संवाद को बढ़ावा

जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभाली तो सबसे पहले उन्होंने युवाओं और सीधे संवाद को बढ़ावा दिया और कांग्रेस में कई चल को बंद कर दिया। संगठन को मजबूत करने का काम युवा नेताओं को दिया। जिसकी बदौलत तीन राज्यों में पार्टी ने जीत हासिल की। उन्होंने बुजुर्ग नेताओं को पूरी तरह दरकिनार तो किया जिसको लेकर उन्होंने कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ा। गुजरात में हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठकोर, सचिन पायलट और ज्योतिरादित्या सिंधिया जैसे नेताओं के साथ कांग्रेस को फायदा भी मिला।

राहुल ने कांग्रेस की छवि को बदला

हमेशा से ही कांग्रेस की हार के लिए सबसे बड़ी वजह ये थी कि पार्टी अल्पसंख्यकों की ओर ज्यादा झुकाव रखती है। जिसकी वजह से बहुसंख्यकों में नाराजगी थी। राहुल ने ऐसे छवि को तोड़ा और वो मस्जिद से लेकर मंदिर और दरगाह तक गई और एंटी हिंदु की छवि को तोड़ा। इस बदली हुई छवि को लेकर कांग्रेस के नेताओं ने कहना है पार्टी अब सॉफ्ट हिंदुत्व से बीजेपी मुकाबला करेगी।
नया साल शुरू होने वाला है और इस साल लोकसभा चुनाव को लेकर देश की राष्ट्रीय पार्टियों से लेकर क्षेत्रीय पार्टियों के गठबंधन की पहली शुरू हो चुकी हैं। सीट शेयरिंग को लेकर कई पार्टियों के बीच गठबंधन हो चुका है तो कई के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत का दौर जारी है। ऐसे में अब आम चुनाव 2019 के परिणाम ही बता पाएंगे कि आखिर देश की पसंद कौन बनेंगे नरेंद्र मोदी या फिर राहुल गांधी...
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